नई दिल्ली/ हिंदू पंचांग के अनुसार 11 मार्च को फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की तिथि को यानी कल महाशिवरात्रि का पर्व है. शिवभक्त इस शिवरात्रि का वर्षभर इंतजार करते हैं. इस दिन बड़ी संख्या में लोग भोलेनाथ का व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं. माना जाता है कि प्रभु शिव जी अपने भक्तो से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है.

अगर हम प्रभु शिव जी की प्रिय चीजों की बात करें तो सबसे पहले बेलपत्र का नाम आता है और यह तो हर कोई जानता है कि प्रभु शिव जी को बेलपत्र बेहद पसंद है. खासकर महाशिवरात्रि वाले दिन शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाए बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है. ऐसी मान्यता है कि शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और श्रद्धालु को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इसलिए अगर आप भी भोलेनाथ की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो शिवरात्रि पर शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाए. लेकिन क्या आप जानते है कि आखिर प्रभु शिवजी को बेलपत्र इतना प्रिय क्यों है.

बेलपत्र में तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं और इसको लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित भी हैं. तीन पत्तों को कहीं त्रिदेव  यानी सृजन, पालन और विनाश या फिर ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी के प्रतीक माने जाते है तो कहीं तीन गुणों सत्व, रज के प्रतीक माने जाते है. बेलपत्र की इन तीन पत्तियों को महादेव की तीन आंखें या उनके शस्त्र त्रिशूल का भी प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जो भी बेल वृक्ष की जड़ के पास शिवलिंग रखकर भोले की पूजा करते हैं. वे हमेशा सुखी रहते हैं. उनके पर‍िवार पर कभी कोई कष्‍ट नहीं आता है.

प्रभु शिव जी पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त ध्यान रखे कि कभी भी टूटे हुए बेल पत्र या फिर दो मुंह वाले बेलपत्र नहीं चढ़ाएं. हमेशा उन्हें पांच या तीन मुख वाले बेलपत्र अर्पित करें.

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