नई दिल्ली/ शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है जिसका नाम दो शब्दों से मिलकर बना हैं. शिव का अर्थ है ‘कल्याणकारी’ और लिंग का अर्थ है ‘सृजन’. जहां अन्य देवी- देवताओं की मूर्ति की पूजा की जाती हैं. वही शिव की पूजा सिर्फ लिंग की पूजा करने से हो जाती हैं. शिवलिंग को शक्ति के रूप में पूजा जाता है.

महाशिवरात्रि फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है. इस बार महाशिवरात्रि का व्रत 11 मार्च 2021 को यानी दिन गुरूवार को पड़ रहा है. महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. शिवरात्रि का पर्व साल में दो बार व्यापक रुप से मनाया जाता है. एक फाल्गुन के महीने में तो दूसरा श्रावण मास में.

जानिए महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त

निशित काल पूजा मुहूर्त: 11 मार्च, रात 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक

पहला प्रहर: 11 मार्च की शाम 06 बजकर 27 मिनट से 09 बजकर 29 मिनट तक

दूसरा प्रहर: रात 9 बजकर 29 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक

तीसरा प्रहर: रात 12 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 32 मिनट तक

चौथा प्रहर: 12 मार्च की सुबह 03 बजकर 32 मिनट से सुबह 06 बजकर 34 मिनट तक

महाशिवरात्री पारणा मुहूर्त: 12 मार्च, सुबह 06 बजकर 36 मिनट से दोपहर 3 बजकर 04 मिनट तक

जानिए महाशिवरात्रि का महत्व

महाशिवरात्रि वाले दिन माता पार्वती जी और भगवान शिव जी का विवाह हुआ था. ऐसी मान्यता है कि शिव-शक्ति के मिलन के इस पावन पर्व पर व्रत और पूजन करने से वैवाहिक जीवन की सभी समस्याओं का समाधान होता है. इसके लिए पति-पत्नी दोनों को व्रत करके भगवान शिव जी और माता पार्वती जी की पूजा सच्चे दिल से करनी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत रखने से मनचाहे वर की भी प्राप्ति होती है. महाशिवरात्रि के व्रत को करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है.

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