नई दिल्ली : हिंदू धर्म के अनुसार सभी महीनों की अपनी एक विशेषता होती है. इसी तरह माघ मास भी काफी महत्वूर्ण माना जाता है. माघ माह की कृष्ण पक्ष की तीथी पर माघ अमावस्या मनाई जाती है. इस साल माघ अमावस्या 11 फरवरी को मनाई जा रही है. माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन मनुष्य को मौन रहना चाहिए और पवित्र नदी या कुंड में स्नान करना चाहिए. माघ मास की अमावस्या के दिन स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है.

माघ अमावस्या का शुभ मुहूर्त

फरवरी 11, 2021 को 01:10:48 से अमावस्या आरम्भ।
फरवरी 12, 2021 को 00:37:12 पर अमावस्या समाप्त।

माघ अमावस्या के व्रत नियम

मौनी या माघ अमावस्या के दिन सुबह स्नान नदी, सरोवर या पवित्र कुंड में स्नान करना चाहिए. स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए. इस दिन व्रत रखकर जहां तक संभव हो मौन रहना चाहिए. साथ ही इस दिन गरीब व भूखे व्यक्ति को भोजन अवश्य कराएं. इसके अलावा जरुरतमंदों को अनाज, वस्त्र, तिल, आंवला, कंबल, पलंग, घी का दोन करें अगर इतना नहीं कर सकते तो केवल गौ शाला में गाय के लिए भोजन का दान भी कर सकते हैं. कहा जाता है कि हर अमावस्या की भांति माघ अमावस्या पर भी पितरों को याद करना चाहिए. इस दिन पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.

माघ अमावस्या का महत्व

मान्ययता है कि माघ अमावस्या के दिन मौन रहने से मुनि पद की प्राप्ति होती है. लेकिन, अगर आप मौन नहीं रह सकते हो तो माघ अमावस्या के दिन किसी के लिए कटु वचनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. आज के दिन को वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है. वैसे तो हर अमावस्या का दिन काफी अहम होता है लेकिन माघ मास अमावस्या के दिन मौन व्रत रखकर मन को संयम में रखने का विधान बताया गया है. मौनी अमावस्या के दिन भगवान शिव और विष्णु जी की पूजा की जाती है.

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