नई दिल्ली:  आज भी गोकुल की गलियों में लोगों को कान्हा का एहसास होता है. बडे़- बड़े मंदिर संकरी गलियों में कुछ ऐसे बने हुए हैं, जैसे वो कृष्ण के समय में होंगे. पूरी दुनिया में कृष्ण के भक्त जहॉ भी रहते हैं, वहॉ जन्माष्टमी का त्यौहार पूरे देश में बहुत ही धूम धाम से मनाई जाती है. इस बार 2 सितंबर को जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाएगा. लेकिन जहॉ कान्हा का लालन पालन हुआ, जो उनकी नगरी है. वहॉ जन्माष्टमी बहुत ही अलग अंदाज में मनाया जाता है. इस बार हम आपको गोकुल में मनाए जाने वाली अष्टमी के बारे में बताते हैं. 

1.छठी मनाई जाती है पहले

कृष्ण के जन्म से पहले उनकी छठी की पूजा गोकुल के मंदिरो और नंदजी के घर में की जाती है. इस बात को जानने के बाद शायद आपको हैरानी होगी. लेकिन जन्माष्टमी से पहले गोकुल में छठी पूजी जाती है. 

2. ये रस्म क्यों हुई शुरू

गोकुल में छठी पूजने के पीछे कथा ये है कि नंदजी के घर जब वासुदेव जी कृष्ण को टोकरी में रखकर छोड़ कर गए थे, तब कंस ने पुतना को आदेश दिया था कि गोकुल और उसके आस पास छह दिन के भीतर जन्में बच्चे को मार दें. 

3. पूजा करना माता यशोदा भूल गईं

कंस के आदेश पर पूतन ने गोकुल पहुंच बच्चों को मारना शुरू कर दिया, जब इसके बारे में माता यशोदा को खबर मिलीं तो वो कृष्ण को इधर- उधर छुपाने लगीं. जिसके चलते वो छठी की पूजा करना भूल गईं.

4. पूतना को कान्हा ने मार दिया

कंस के आदेश पर पूतना बच्चो को उठा कर ले जाती, उन्हें अपना स्तनपान करा मार देती थी. माता यशोदा ने कृष्ण को छुपाने की बहुत कोशिश की इसके बावजूद पुतना श्रीकृष्ण को उठा कर ले जाने में कामयाब रही. उसके बात पूरना ने स्तनपान करना शुरू किया तभी कृष्ण ने पूतना के स्तन में जोर से काट लिया और उशकी मृत्यु हो गई. आखिर श्रीकृष्ण कोई साधारण बच्चे थोड़ी थे, भगवान का साक्षात अवतार थे. 

5. यशोदा से बड़ी- बूढ़ी महिलाओं ने कहा

बचपन में ही पूतना को मारने के बाद श्रीकृष्ण ने कई राक्षसों का संहार किया. जब एख साल बाद कृष्ण की जन्मतिथि आई तो यशोदा मईया ने पूरे गोकुल वासियों को न्यौता कृष्ण के जन्मदिन में शामिल होने के लिए भेजा. ऐसे में यशोदा मईया से कुछ बड़ी- बूढ़ी महिलाओं ने कहा कि जब हमने कृष्ण की छठी नहीं मनाई है तो उसका जन्मदिन कैसे मना सकते हैं. 

6. ऐसे शुरू हो गई फिर प्रथा

यशोदा मईया ने बुजुर्ग और बड़े लोगो के कहने पर कृष्ण के जन्दिन से एक दिन पहले छठी मनाई. तबसे ये प्रथा चली आ रही है कि कृष्ण जन्माष्टमी से पहले उनका छठी मनाई जाती है. 

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