नई दिल्ली. करवा चौथ के दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. इस दिन चौथ माता की पूजा होती है. इसके साथ ही महिलाएं छलनी से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं. इस वर्ष करवा चौथ का त्योहार 17 अक्टूबर 2019 को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा. हिंदू शास्त्रों में कहा गया है कि करवा चौथ का व्रत एक सुहागन स्त्री के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. इस दिन पत्नी अपने पति से प्यार का इजहार करती है और भगवान से पति की लंबी आयू की कामना करती हैं. इस दिन सुहागिन महिलाएं छलनी से चांद को अर्घ्य देती हैं. इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे की करवा चौथ के दिन चंद्रमा को अर्ध्य देने के लिए छलनी का इस्तेमाल क्यों किया जाता है.

करवा चौथ के मौके पर क्यों खास है छलनी
चंद्रमा को दीर्घायु प्रदान करने वाला कारक माना जाता है. साथ ही चांद सुंदरता और प्रेम का प्रतिबिंब है. इसी वजह से करवा चौथ के दिन सुहागनें छलनी से पहले चांद और फिर अपने पति का दर्शन करते हुए उनकी लंबी आयू की कामना करती हैं.

दरअसल छलनी का इस्तेमाल अक्सर आटा और अन्य तरह की खाने की वस्तुओं को छानने के लिए किया जाता है. छलनी से छनने के बाद किसी भी वस्तु की अशुद्धियां अलग हो जाती हैं. यानी जो भी मिलावटी तत्व होते हैं वे छलनी में ही रुक जाते हैं.

छलनी का काम अशुद्धियों का अलग करना है जिन्हें हम अपनी आंखों से देख नहीं सकते. इसलिए करवा चौथ के मौके पर छलनी से ही पहले चांद को देखा जाता है. छलनी से चांद को देखकर पति की दीर्घायु और सौभाग्य में बढ़ोतरी की प्रार्थना की जाती है. करवा चौथ के लिए विशेष तौर पर नई छलनी खरीदी जाती है. जिसके बाद छलनी की पूजा की जाती है.

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