नई दिल्ली: हिंदू धर्म के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का महत्व बहुत ज्यादा माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था, इसलिए इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. साथ ही जब दैत्य त्रिपुरासुर का वध हुआ था, तो देवताओं को बहुत खुशी हुई थी और उन्होंने कार्तिक पूर्णिमा के दिन को रोशनी के दिन के रूप में मनाया था इसलिए, इस दिन को देव-दिवाली के रूप में भी जाना जाता है. 

पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन सोनपुर में गंगा गंडकी के संगम पर गज और ग्राह का युद्ध हुआ था. भगवान विष्णु गजराज की रक्षा के लिए नंगे पैर ही दौड़ पड़े थे और ग्राह का संहार कर गजराज की जान बचाई थी. कार्तिक पूर्णिमा को खास पर्व इसलिए भी मना जाता है, क्योंकि इस दिन देवी-देवता दिवाली का पर्व मनाते हैं. ऐसा भी बताया जाता है कि इस दिन को दीप दान करने से उनका आर्शीवाद प्राप्त होता है. वहीं, गंगा या किसी पवित्र नदी में पूर्णिमा की रात को दीप जलाने से लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होती हैं.

कार्तिक पूर्णिमा 2020 का शुभ मुहूर्त

29 नवंबर को 12:49:43 से पूर्णिमा आरम्भ
30 नवंबर को 15:01:21 पर पूर्णिमा समाप्त

कार्तिक पूर्णिमा व्रत की पूजन विधि

कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह किसी पवित्र नदी, तलाब या कुंड में स्नान करने का बहुत महत्व माना गया है. इस दिन स्नान के बाद पूजन और दीपदान करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा का व्रत करने वाले अगर बैल का दान करें तो उन्हें शिव पद प्राप्त होता है. कार्तिक पूर्णिमा का व्रत रखने वालों को इस दिन हवन जरूर करना चाहिए और किसी जरुरतमंद को भोजन कराना चाहिए.

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