नई दिल्ली: वैसे तो साल भर में 24 एकादशी पड़ती है. लेकिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) कहते हैं. सावन के शुभ महीने में पड़ने वाली एकादशी कई मायनों में खास होती है. इस एकादशी पर पूर्ण पूजा विधि और व्रत करने से मनचाहा फल की प्राप्ति होती है. कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा कर तमाम पापों का नाश होता है. साथ ही हर बिगड़े काम पूरे होते हैं. इस बार कामिका एकाशदी 7 अगस्त 2018 की पड़ रही है. इस दिन भगवान विष्णु का नाम लेकर अपना व्रत शुरू किया जाता है और सारा दिन व्रत कर भगवान विष्णु की कथा अवश्य सुननी चाहिए.

कामिका एकादशी व्रत कथा:

इस कथा की शुरुआत युधिष्ठिर के भगवान कृष्‍ण से यह पूछने पर होती है जिसके बाद भगवान कृष्ण ने कथा सुनानी प्रारंभ की और पूर्ण कथा सुनाई. दरअसल एक शहर में एक ठाकुर और ब्राह्मण रहते थे. इन दोनों की कभी नहीं बनी ये सदैव लड़ते रहते थे. लेकिन एक दिन यह विवाद इतना बढ़ गया कि ठाकुर ने ब्राह्मण को मार डाला. जिसके बाद गांव की शांति भंग हो गई और ब्राह्राण जाति के सभी लोग ठाकुर से नाराज हो गए. साथ ही ब्राह्मणों ने ठाकुर के घर खाना खाने से मना कर दिया.

इस कड़ी सजा के बाद ठाकुर नगर में अकेला पड़ गया और वह खुद को दोषी मानने लगा साथ ही प्रश्चाताप की सोची. जिसके बाद ठाकुर एक दिन एक मुनि के पास जाता है और अपनी गलती को सुधारने के बारे में पूछा. जिसके बाद मुनी ने ठाकुर को पापों का निवारण करने वाली पूजा के बारे में बताया. साथ ही मुनि को बताया कि वह वह कमिका एकदशी का उपवास जरूर करें इससे उसे उसके पापों से छुटकारा मिल जाएगा. इस व्रत के करने के बाद साक्षात भगवान विष्णु ठाकुर के सपने में दिखे और कहा कि तुम्हारे सच्चे दिल से किए गए व्रत व कामना की वजह से पापों की छुटकारा मिलता है.

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