नई दिल्ली. इस साल 19 नवंबर को कालभैरव जयंती है और ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने काल भैरव के रूप में अवतार लिया. कहा जाता है कि काल भगवान भैरव से भी डरते हैं, इसी कारण से उन्हें काल भैरव भी कहा जाता है. आपको बता दें कि जो व्यक्ति काल भैरव की भक्ति करता है, उसे अपने पापों से स्वतः मुक्ति मिल जाती है और मृत्यु के बाद उसकी आत्मा को शिवलोक में स्थान मिलता है. शराब भैरव बाबा को बहुत प्रिय है और पूजा के समय भक्त उन्हें शराब भी चढ़ाते हैं.

दरअसल, उनके मंदिरों में शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है और भैरव बाबा को शराब चढ़ाने से हर मनोकामना पूरी हो सकती है. आप भी काल भैरव अष्टमी से एक दिन पहले, एक शराब खरीदें जिसमें गोमूत्र के समान रंग हो और इसे सोते समय अपने तकिए के पास रखें. फिर सुबह यानी कालभैरव जयंती के दिन, भैरव बाबा के मंदिर में जाएं और शराब को कांसे की कटोरी में डालकर आग लगा दें, क्योंकि ऐसा करने से राहु का प्रभाव शांत हो जाएगा और मन की सभी इच्छाएं पूरी होंगी. आपको बता दें कि कालभैरव जयंती के दिन, भैरव बाबा के मंदिर में जाकर शराब की एक बोतल चढ़ाते हैं और इसे एक सफाई कर्मचारी को उपहार के रूप में देते हैं, जीवन में सभी समस्याओं का अंत हो जाता है.

काल भैरव पूजा शुभ मुहूर्त-

काल भैरव जयंती के दिन आपको पूजा करने से पहले रात में ही पूजा का सामान जुटा लेना चाहिए. सुबह उठकर पूजा करने के लिए नहा-धोकर पूजा सामग्री लेकर मंदिर जाकर ध्यान पूर्वक पूजा करें. काल भैरव पूजा का मुहूर्त सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक हैं. हालांकि पूरे दिन में कभी भी पूजा की जा सकती है लेकिन आपर पूजा करने से पहले ये ध्यान रखें कि आप जब पूजा कर रहे हैं उस समय राहु काल तो नहीं हैं.

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