नई दिल्ली. Jyeshtha Purnima 2019 Vrat Kath: ज्येष्ठ मास के शुल्क पक्ष की पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है. हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा एक साल में पड़ने वाली पूर्णिमा में से खास मानी जाती है. दक्षिण भारत में ज्येष्ठ पूर्णिमा को बड़ी ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है. ज्येष्ठ पूर्णिमा इस साल 16 जून रविवार को मनाई जाएगी. दरअसल इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रख वट वृक्ष की पूजा करती हैं. यही वजह है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा का दूसरा नाम वट पूर्णिमा रखा गया है. पुराणों के आधार पर ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन इंद्र देवता की से विनती करते हैं कि बारिश हो ताकि गर्मी के प्रचंड दौर के महीने में नदी, तालाब झीलें जलमग्न रहें और किसानों को फैसलों के लिए लाभ मिले. इस बीच हम आपको ज्येष्ठ पूर्णिमा के महत्व, व्रथ कथा और विधि की पूरी जानकारी देंगे.

ज्येष्ठ पूर्णिमा महत्व-

हिंदू शास्त्रों के मुताबिक ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जो सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखती है और विधि विधान पूजा करती हैं उनको सौभाग्य की प्राप्ती होती है. साथ ही उनके पति और बच्चों की आयु भी बढ़ती है. इसके अलावा सभी पापों से मुक्ति से भी मिलती है.

ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) व्रत कथा-

गौरतलब है कि पौराणिक कथाओं के माध्यम से एक दिन मद्र देश के राजा अश्वपति ने संतान प्राप्ती के यज्ञ किया और 18 साल तक चलने वाले इस यज्ञ के बाद सावित्री देवी (गायत्री और सरस्वती) ने राजा अश्वपति को एक कन्या प्राप्ती का वरदान दिया. ऐसे में राजा कुछ समय बाद पुत्र की प्राप्ती हुई और उन्होंने उस कन्या का नाम सावित्री ही रखा. धीरे-धीरे जब कन्या बड़ी हो गई तो शादी के लिए योग्य वर न मिलने पर राजा अश्वपित चिंतित होने लगे और सावित्री दुखी होकर तपोवन में भटकने लगी. वहां सावित्री को साल्व देश के राजा धुमत्सेन (जिनका राज्य छीन चुका था) के बेटे से सावित्री की मुलाकात हुई.

नारद मुनि ने सावित्री को बताया था कि शादी के कुछ समय बाद सत्यवान की मृत्यु हो जाएगी ऐसे में सावित्री सत्यवान से शादी न करें . लेकिन सावित्री ने सत्यावन से शादी और अपनी नारद मुनि की भविष्यवाणी आगे चलकर सही साबित हुई और अल्पायु होने की वजह से एक दिन सत्यवान की मृत्यु वट वृक्ष के नीचे हो गई. लेकिन सावित्री ने अपनी घोर तपस्या और यमराज से विनती से अपने पति के प्राण, अपने सास-ससुर का खोया राज्य और नेत्र ज्योति मांगी. यमराज ने सावित्री को तीनों वरदान दिए और कहा की उसी वट वृक्ष के नीचे तुम्हें तुम्हारा पति जीवित मिलेगा. तभी से ज्येष्ठ पूर्णिमा और वट वृक्ष पूजा का महत्व चलता आ रहा है.

जानें ज्येष्ठ पूर्णिमा 2019 पूजा विधि-

  • ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं.
  • ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट वृक्ष की जाती है.
  • वट वृक्ष फूल माला, अगरबत्ती, दीपक, सिंदूर, चालव आदि पूजा साम्रगी को थाली में सजाकर लाल कपड़े ढक कर ले जाएं.
  • वट वृक्ष के नीचे बैठकर विधि विधान से देवी मां सावित्री की पूजा-अर्चना करें.
  • पूजा करने के साथ सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की प्रक्रिमा करें और देवी मां की आरती का गुणगान करें
  • ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सभी को प्रसाद के रूप में मिठाई, फल आदि को वितरित करें.

Jyeshtha Purnima 2019: ज्येष्ठ पूर्णिमा कल, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व

Jyeshtha Purnima 2019: जानिए कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा, महत्व, तिथि, पूजा, शुभ मुहूर्त

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