नई दिल्ली. Jitiya Vrat 2019 Date: संतान की लंबी आयु की कामना के लिए जितिया व्रत रखा जाता है. इस व्रत को कहीं कहीं जिउतिया या जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है. ये व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. जितिया व्रत को महिलाएं छठ व्रत की तरह तीन तक करती हैं. जितिया व्रत का काफी महत्व है, हिन्दू धर्म में मान्यता के अनुसार व्रती को कभी भी जीवन में संतान वियोग नहीं होता है. हम आपको बता रहे हैं तीन तक जितिया व्रत पूजन विधि, जिसमें नहाय खाय, निर्जला व्रत और पारण शामिल है.

आपको बता दें कि अश्विन मास के कृष्णपक्ष की सप्तमी से शुरू हुआ जितिया व्रत नवमी तक मनाया जाता है. यह व्रत तीन तक मनाया जाता है, जिसमें पहले दिन यानी कि सप्तमी के दिन नहाय खाय, दूसरे दिन यानी अष्टमी को निर्जला व्रत किया जाता है और अंतिम दिन यानी नवमी के दिन माताएं जितिया व्रत का पारण किया करती हैं. ऐसा ककहा जाता है कि जो इस महिला जितिया व्रत कथा को सुनती है, वह जीवन में कभी संतान वियोग नहीं होती है. संतान के सुखी और निरोग जीवन के लिए यह व्रत रखा जाता है.

Jitiya Vrat 2019 Dates: जितिया व्रत करने की तारीख
जितिया व्रत छठ पर्व की तरह तीन दिन का होता है. इस व्रत में तीनों दिन अलग-अलग कार्य किए जाते हैं. नहाय खाय, निर्जला व्रत और पारण की तारीख निम्नलिखित है.

नहाय खाय की तारीख- 21 सितंबर
निर्जला व्रत की तारीख-22 सितंबर
जितिय व्रत पारण की तारीख- 23 सितंबर

Nahay Khay Vidhi: नहाय खाय की विधि

जितिया व्रत की शुरुआत छठ की तरह नहाय खाय से होती है. इस दिन माताएं सुबह उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करती हैं और पूजा करती हैं. पूजा के दौरान महिलाए व्रत संकल्प लेती हैं. नहाय खाय के दिन महिलाएं सिर्फ एक बार ही भोजन कर सकती हैं. जितिया व्रत के पहले दिन की रात को घर की छत पर चारों दिशाओं में कुछ खाना रखा जाता है.

Nirjala Vrat Vidhi: निर्जला व्रत की विधि

जीवित्पुत्रिका व्रत या कहें जितिया व्रत के दूसरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. इस दिन महिलाएं बिना जल के रहती हैं और अगले दिन यानी कि पारण होने तक कुछ नहीं खाती हैं. निर्जला व्रत में कुछा खाया या पिया नहीं जा सकता है.

Vrat Paaran Vidhi: व्रत पारण की विधि

जितिया व्रत के तीसरे यानी कि आखिरी दिन पारण किया जाता है. यूपी बिहार, झारखंड समेत अन्य राज्यों में पारण अलग-अलग विधि से किया जाता है. व्रत का पारण प्रात: काल किया जाता है. पारण के बाद आप किसी भी तरह का भोजन ग्रहण कर सकते हैं.

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