नई दिल्ली. कोरोना वायरस का कहर इन दिनों हर तरफ जारी है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह जानलेवा वायरस आखिर क्या है और इससे हमें कैसे नुकसान होता है. दरअसल इस वायरस से लड़ने की ताकत हमारी पूजा में है. हमारी पूजा में इस्तेमाल होने वाले शंख, आरती और यहां तक की मंत्रों में भी इस वायरस को भगाने की ताकत है.

शंख, घंटी, आरती, हवन से कैसे आप वायरस या कुछ रोगों को पनपने से पहले ही भगा सकते हैं ये जानने से पहले आपको ये जरुर जान लेना चाहिए कि आखिरकार वायरस है क्या. वायरस को हिंदी में विषाणु कहते हैं, विषाणु दो शब्दों से मिलकर बना है विष और अणु. विष का मतलब होता है जहर और अणु तो आप सब जानते ही हैं तो आसान शब्दों में कहा जाए तो वायरस जहर का अणु है. 

विज्ञान के अनुसार बात करें तो विषाणु अकोशिकीय अतिसूक्ष्म जीव हैं जो सिर्फ जीवित कोशिका में ही ग्रोथ कर सकते हैं तो कोरोना का वायरस हवा में है तब तक इससे किसी को कोई नुकसान नहीं है लेकिन ये विषाणु जैसे ही हमारे शरीर के अंदर सांस लेने से पहुंचता है वैसे ही ये एक्टिव हो जाता है और हमारे शरीर में अपना जहर फैला देता है.

वायरस क्या है ये बात तो आपको अच्छे से समझ आ गई होगी लेकिन हमारी भारतीय पूजा से कैसे ये खतरनाक वायरस भाग सकता है या खत्म हो सकता है, अब समझिए. दरअसल जहां पूजा होती है वहां एक सुरक्षा कवच बन जाता है. शंख की आवाज़ से वायु में जितनी भी नेगेटिव एनर्जी होती है या विषाणु होते हैं वो दूर हो जाते हैं. जहां शंख बजता है वो उसकी रेंज में नहीं रह पाते हैं.

जहां साफ सफाई होती है वहां बदबू नहीं होती ना ठीक उसी तरह से जहां पूजा होती है वहां नेगेटिव एनर्जी नहीं होती. विषाणु भी एक तरह की नेगेटिव एनर्जी ही हैं जो हमारे पास आने की कोशिश करते हैं लेकिन शंख के नाद या घंटी की आवाज से वो दूर हो जाते हैं. ठीक उसी तरह से जब आप हवन सामग्री डालकर कोई हवन करते हैं तो हवन सामग्री में हेल्दी जड़ी बूटियां ही होती हैं जिसका धुआं जब वायु में फैलता है तो कोरोना वायरस जैसे विषाणुओं का अंत हो जाता है.  मंत्रों के उच्चारण से भी हमारे आसपास की एनर्जी पॉज़िटिव होती है और ये बात सिर्फ मैं या हम भारतीय ही नहीं बल्कि कई विदेशी लोग भी मानते हैं. 

वहीं शंख को घर के पूजा स्थल में रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है. वेद पुराणों की मानें तो शंख समुद्रमंथन के दौरान उत्पन्न हुआ है. इसलिए ऐसा कहा जाता है कि जहां शंख होता है वहां महालक्ष्मी का वास होता है. शंख की आवाज से वातावरण में शुद्धता आती है. पूजा की शुरूआत और पूजा में आरती के बाद शंख को बजाया जाता है.

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