नई दिल्ली. होली से कुछ दिन पहले समय को हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार शुभ नहीं माना गया है. इस अशुभ समय को होलाष्टक कहा जाता है. साल 2020 की होली से पहले होलाष्टक अवधि 3 मार्च से शुरू होकर 9 मार्च तक रहेगी.

यह समय होलिका दहन के साथ समाप्त हो जाएगा. होली से पहले आने वाले इस अशुभ समय में किसी भी तरह के शुभ कार्यों को न करने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि अगर व्यक्ति इस समय में शुभ कार्य करता है तो उसका बड़ा नुकसान आपको मिल सकता है.

होलाष्टक के दौरान क्या करें और क्या ना करें
होलाष्टक पर व्रत करने का विशेष लाभ बताया गया है, ऐसा करने से भगवान की कृपा बरसती है. अगर व्रत नहीं कर सकते तो अपनी इच्छा के अनुसार दान कर दें. दान में आप कपड़े या अनाज अथवा धन भी दे सकते हैं. दूसरी ओर इस अशुभ समय में शादी, गृह प्रवेश निर्माण, नामकरण आदि शुभ कार्यों को भूलकर भी न करें. साथ ही किसी भी तरह के नए कार्यों की शुरुआत न करें.

क्यों माना जाता है होलाष्टक को अशुभ
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, नारायण भक्ती में लीन प्रह्लाद की भक्ती को देखकर राजा हिरण्यकश्यप काफी ज्यादा क्रोधित हो गए और होली से पहले 8 दिनों तक प्रह्लाद को कई तरह के कष्ट दिए गए. उसी दौरान से होली से पहले इन 8 दिनों को अशुभ माना जात है.

ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इन 8 दिनों ग्रह अपने स्थान में बदलाव करते हैं. इसी वजह से ग्रहों के चलते इस अशुभ समय के दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है. ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य करने से व्यक्ति के जीवन में कष्ट, दर्द का प्रवेश होता है. अगर इस समय में कोई विवाह कर लें तो भविष्य में कलह का शिकार या संबंधों में टूट पड़ सकती है.

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