नई दिल्ली: Hartalika Teej 2018:हरतालिका तीज का विशेष महत्व हिन्दू धर्म मानने वाली महिलाओं में होता है. इस दिन गौरी और शंकर जी की पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है. माना जाता है कि ये व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति के लंबी आयु के लिए रखती हैं, तो वहीं कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर के लिए इस व्रत को करती हैं. मुख्य रूप से हरतालिका तीज को बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पूरे विधि विधान के साथ किया जाता है. तमिलनाड्डु, कर्नाटका और आंध्र प्रदेश में हरतालिका तीज को गौरी हिब्बा कहा जाता है.

कब है हरतालिका तीज 2018 ?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार देखा जाए तो हरतालिका तीज व्रत भादो माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी भाद्रपद को रखी जाती है. इस बार ये व्रत 12 सितंबर को कैलेंडर के अनुसार पड़ा है.

हरितालिका तीज का महत्व
हिंदू धर्म में चार तीज मनाई जाती है जिसमें से सबसे ज्यादा हरितालिका तीज का महत्व होता है. दो शेब्दों से मिलकर हरतालिका तीज बना है- हरत और आलिका. बता देंं हरत का मतलब होता है अपहरण और आलिका का मतलब होता है सहेली. प्रातीन मन्यता कि तरफ ध्यान दें तो माना जाता है कि मां पार्वती की सहेली घने जंगल में ले जाकर उन्हें छुपा देती है, जिससे उनके विवाह भगवान विष्णु से ना हो सके . क्योंकि माता पार्वती के पिता विष्णु से उनका विवाह करवाना चाहते थे. हरतालिका तीज में सुहागिनों की गहरी आस्था होती है. इस दिन सुहागिने निर्जला व्रत अपने पति के लंबी उम्र के लिए रखती हैं. ऐसा कहा जाता है कि सुहागिने इस व्रत को रखती है तो शिव और पार्वती उन्हें अखण्ड सौभाग्य होने का वरदान देते हैं. वहीं अगर कुंवारी लड़किया रखती हैं तो उन्हें मनचाहा वर मिलता है.

हरितालिका तीज 2018 की तिथि और शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारंभ: 11 सितंबर 2018 को शाम 6 बजकर 4 मिनट
तृतीया तिथि समाप्त : 12 सितंबर 2018 4 बजकर 7 मिनट
प्रात: काल हरतालिका पूजा का मुहूर्त: 12 सितंबर 2018 की सुबह 6 बजकर 15 मनट से सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक

कैसे करें हरतालिका तीज का व्रत ?
हरतालिका तीजसके व्रत को बहुत ही ज्यादा कठिन व्रत कहा जाता है. इस दिन सुहागिने निर्जल व्रत रखती हैं, पारण से पहले अपने मुंह में पानी की एक बूंद तक नहीं डालती . हरतालिका तीज वाले दिन स्नान आदि करने के बाद उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये मंत्र का जाप करते हुए अपने व्रत को आरंभ करती हैं.

हरतालिका तीज व्रत के नियम
1. सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्यांए हरतालिका तीज को करती हैं. लेकिन एक बार इस व्रत को जो भी रख लेता है मान्यता है कि उसे ताउम्र इस व्रत को रखना पड़ता है.
2. महिला कभी अगर ज्यादा बिमार हो जाती है, तो उसके बदले में उसका पति या फिर घर की कोई और महिला भी इस व्रत को रख सकती है.
3. हरतालिका तीज के व्रत में सोने पर पाबंधी होती है. दिन में ही नहीं बल्कि इस दिन रात में भी सोना वर्जित माना जाता है. पूरी रात इस दिन भजन और कीर्तन होता है. ऐसा कहा जाता है कि जो भी इस व्रतो को रखता है और रात में सो जाता है तो वो अगले जन्म में अगर के रूप में पैदा होता है.
4. हरतालिका तीज के दिन अगर महिलाएं गलती से भी कुछ खा लेती हैं , तो अगले जन्म में बंदर बन जाती हैं.
5. अगर हरतालिका तीज के दिन महिला दूध का सेवन कर लेती है तो अगले जन्म में उसका जन्म सर्प योनि में होता है

हरतालिका तीज की पूजन सामग्री
हरतालिका तीज व्रत रखने से एक दिन पहले महिलाएं पूजा की पूरी सामग्री गीली मिट्टी, शमी पत्र, धतूरे का फल और फूल, बेल पत्र, केले का पत्ता, तुलसी, अकांव का फूल, वस्त्र, जनेऊ, मंजरी, नारियल, मौसमी का फल-फूल, चंदन, घी, कलश, अबीर, कुमकुम, कपूर,दही, दूध, चीनी, दीपक, और शहद को एकत्रित कर लें.

मां पार्वती की सुहाग सामग्री: सुहाग पिटारी, माहौर, कंघी, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, मेंहदी, बिछिया, चूड़ी, काजल.

हरतालिका तीज व्रत की कथा

पुरानी मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत के बारे में शिवजी ने माता पार्वती को विस्तार पूर्वक समझाया था. बता दें हिमालय के घर में मां गौरा ने माता पार्वती के घर में जन्म लिया था. भगवान शिव को बचपन से माता पार्वती वर के रूप में पाने की चाह रखती थीं. जिसके लिए माता पार्वती ने कठोर तप किया था. 12 सालों तक माता पार्वती ने निरहार और निर्जला रह कर तप किया था. एक दिन नारज जी ने हिमालय से कहा कि आपकी पुत्री पार्वती के तप से प्रसन्न होकर विष्णु जी आपकी पत्नी से शादी करना चाहते हैं. हिमालय नारद जी कि इस बात से बहुत प्रसन्न हुए. इतना ही नहीं बल्कि नारद जी ने भगवान विष्णु के पास जाकर बोला कि हिमालय अपनी पुत्री का विवाह आपसे करवाना चाहते हैं. जिसके बाद भगवान विष्णु ने भी हामी भर दी.

उसके बाद नारद जी ने माता पार्वती के पास जाकर बताया कि उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु के साथ करपवाना चाहते हैं. पार्वती इस बात को सुनने के बाद बहुत निराश हुईं. जिसके बाद उन्होने अपनी सहेली से कहा कि उन्हें कहीं एकांत गुप्त स्थान पर ले कर चलें. माता पार्वती के कहने पर उनके पिता से छुपा कर उनकी सहेलियां उन्हें घने सुनसान जंगल में स्थित एक गुफा में छोड़ आती हैं. इसी गुफा में रहकर माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तप करती हैं. जिसके लिए रेत से शिवलिंग बनाता हैं. और इस दिन संयोग से हस्त नक्षत्र में भाद्रपद शुक्ल तृतीया का वो दिन पड़ा था. जिस दिन माता पार्वती ने शिवलिंग की स्थापना की थी. इस दिन माता पार्वती ने निर्जला उपवास रखते हुए रात में जागरण भी किया था.

जिसके बाद माता पार्वती के कठोर तप से खुश होकर शिव जी ने उन्हें मनोकामना पूर्ण होने का वरदान दिया था. उसेक अगले दिन माता प्रर्वती ने अपनी सहेलियों के साथ व्रत का पारण किया था. साथ ही पूजा की समस्त सामग्री को गंगा नदी में प्रवाहित किया था. उधर माता पार्वती के पिता व्याकुल थें , क्योंकि उन्होनें विष्णु जी को उपनी पु त्री से विवाह कराने का वचन दिया था. और पुत्री घर छोड़ कर चली गई थी. उसके बाद हिमालय पार्वती के ढुंढते हुए जहॉ पर्वती छुपी थीं उस गुफा तक जा पहुंचे. उसेक बाद माता पार्वती ने अपने पिता को घर छोड़ने का कारण बताया और शिव से विवाह करने के खुद के संकल्प और शिव के वरदान के बारे में भी हिमालय को बताया. उसके बाद हिमालय ने भगवान विष्णु से क्षमा मांगी और भगवान शिव से अपनी पुत्री के विवाह के लिए राजी हो गए.

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