नई दिल्लीः हिन्दू पंचांग के अनुसार अमावस्या कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन बोला जाता है. उस के बाद शुक्ल पक्ष का आरंभ होता है. कृष्ण पक्ष के दौरान चंद्रमा धीरे धीरे अपने आकार में कम होता रहता है. अमावस्या की रात्रि में चंद्रमा पूरी तरह लुप्त हो जाता है मगर शुक्ल पक्ष तक धीरे धीरे बढ़ना शुरू हो जाता है और पूर्णिमा वाली रात को अपना वास्तिविक रूप ले लेता है.

सूर्यग्रहण भी अमावस्या के दिन ही पड़ता है. पर चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन ही पड़ता है. बहुत सारे स्थानों पर अमावस्या के दिन को शुभ नहीं माना जाता है. पर अगर धार्म के तौर पर देखो तो इस का भी खास महत्व है. दान देने के लिए अमावस्या का दिन बहुत अच्छा मानते है. यहाँ पर आप को अगस्त की अमावस्या के बारे में जानकारी होगी. अमावस्या विशेष रूप से पितरों की आत्मा की शांति के लिए, हवन-पूजा, श्राध्द, तर्पण आदि करने के लिए अमावस्या की तिथि सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

हरियाली अमावस्या 2018 का महत्व
सावन का पूरा महीना हरियाली और प्रकृति में मिला होता है. हरियाली अमावस्या के पेड़-पौधे की पूजा होती है. और इस दिन ही पीपल पेड़ की पूजा होती है. लड़किया उन के फेरे लेती हैं और पीपल को मालपुओं का भोग लगाया जाता है.

अमावस्या के दिन पीपल, बरगद, नींबू, केला और तुलसी की पूजा होती है और इस का रोपण होता है जिस को शुभ माना जाता हैं. क्यों कि कहा जाता है कि वृक्षों में देवता निवाष करते है. इस दिन ही गेहूं, ज्वार, मक्का आदि की बुआई भी होती है.अमावस्या के दिन ही फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा , उत्तरा भाद्ररदा, रोहिणी, मृगशिरा, रेवती, चित्रा हस्त आदि नक्षत्र को शुभ माना जाता है.

अगस्त अमावस्या 2018 का महत्व
अगस्त के महिने में सावन का महिना आता है. इस महिने में मौसम कापी सुहावना होतो है और मन को मोह लेने वोला होता है. इस में बादलो की खूबसूरती देखने को मिलती है और धरती हरी चादर में ढ़क जाती है. अगस्त में पोड़- पौधे भी नहा कर ताजा हो जाता है लगता है आज ही उगे हैं. पक्षी चहचहाने लगती है. मौसम पूरा आनंद मय हो जाता है और सावन की अमावस्या के पहले दिम शिवलात्रि का पर्व मनाया जाता है.

अमावस्या तिथि का आरंभ – 19:08 बजे (10 अगस्त 2018)
अमावस्या तिथि का समापन – 15:27 बजे (11 अगस्त 2018)

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