नई दिल्ली : इस साल 14 जनवरी को महा कुंभ मेले का आयोजन होने जा रहा है, इस बार महा कुंभ का आयोजन हरिद्वार में किया गया है जिसकी तैयारी जोर शोर से चल रही है. वहीं श्रद्धालुओं को भी मां पतित पावनी मां गंगा की बहती कल-कल धाराओं के किनारे जाकर डुबकी लगाने को बेहद इंतजार है, माना जाता है कि कुंभ स्नान करने से श्रद्धालुओं के सभी प्रकार के पाप धुल जाते हैं, साथ ही मोक्ष भी प्राप्त होता है. लेकिन इस बार कुंभ में प्रवेश लेना हर बार की तरह आसान नहीं होने वाला है बल्कि, कोरोना के चलते सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षा के सभी नियमों का ध्यान रखना होगा, साथ ही प्रवेश लेने से पहले थर्मल स्क्रीनिंग सहित अन्य आवश्यक प्रक्रियों से गुजरना होगा

बता दें कि कुंभ मेला हर साल आयोजित नहीं होता है. क्योंकि इसके आयोजन का आधार ग्रहों की गति पर निर्भर रहता है. नक्षत्र और राशियां यह निर्धारित करती हैं कि चार निश्चित स्थानों में से किस स्थान पर कुंभ का आयोजन होना है. इसी के चलते इन चार स्थान हरिद्वार में गंगा तट, प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती का संगम तट, नासिक में गोदावरी तट और उज्जैन में क्षिप्रा नदी का तट में से किसी एक स्थान पर आयोजन किया जाता है. वहीं नक्षत्र और राशियो के चलते इस बार महा कुंभ का आगाज शिव के द्वार हरिद्वार में होने जा रहा है.

कुंभ मेले का आयोजन इन चारों में से किस स्थान पर होना है. इसका निर्धारण राशियों की स्थिति करती है. कुंभ के योग बनने के लिए सूर्य और बृहस्पति की गति राशिय़ों की स्थिति का निर्धारण करती है. जब सूर्य और बृहस्पति एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तभी कुंभ मेले का आयोजन होता है. इसी आधार पर स्थान और तिथि निर्धारित की जाती है.

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