नई दिल्ली/ हरिद्वार कुंभ मेला 27 फरवरी से शुरू हो गया है. ऐसे में उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के दौरान गंगा में डुबकी लगाने के इच्छुक सभी तीर्थयात्रियों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. कुंभ मेले में बिना रजिस्ट्रेशन और बिना कोविड निगेटिव रिपोर्ट के प्रवेश नहीं लिया जा सकता है.

तो वही कुंभ के दूसरे प्रमुख आयोजन पेशवाई को लेकर सोच विचार की स्थिति लगभग समाप्त हो गई है. तय हो चुका है कि पेशवाई को परंपरागत मार्ग से ही निकली जाएगी. इसे लेकर जिला प्रशासन, कुंभ प्रशासन और विभिन्न अखाड़ों के प्रशासन के बीच अंतिम दौर की बातचीत हो चुकी है. एसएमजेएन पीजी कॉलेज में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की छावनी में संतों और पुलिस प्रशासन अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में यह तय हुआ कि जूना और अग्नि अखाड़े की पेशवाई पांडेवाला ज्वालापुर से निकलेगी, जबकि निरंजनी अखाड़े की पेशवाई एसएमजेएन कॉलेज मध्य हरिद्वार से निकलेगी. आवाह्न अखाड़े की पेशवाई श्यामपुर से निकलेगी, जबकि अटल अखाड़े की पेशवाई संन्यास मार्ग कनखल से निकलेगी.

पहले हरिद्वार में हुए विभिन्न विकास कार्यों के चलते बने फ्लाईओवर और ओवरब्रिज तथा अंडरपास के कारण पेशवाई मार्ग को लेकर कई तरह की अड़चन पैदा हो गई थी, जिसके कारण पेशवाई मार्ग को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी. जिसके वजह से पेशवाई को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी. अखाड़ों में इसे लेकर असंतोष व्याप्त था. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि पेशवाई को लेकर अधिकांश अड़चनें दूर हो गई हैं. जो बची हैं वह भी दूर होती जा रही हैं.

कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत ने बताया कि पेशवाई मार्ग को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है. तीन मार्च को निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के साथ कुंभ पेशवाई निकलने का क्रम शुरू कर दिया जाएगा. चार मार्च को जूना व अग्नि, पांच मार्च को आवाह्न अखाड़े की पेशवाई निकलेगी, जबकि नौ मार्च को अटल अखाड़े की पेशवाई निकलेगी.

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