नई दिल्ली. इस साल 10 नवंबर को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी पूरे देश में मनाई जाएगी. इस दिन को ईद-ए-मिलाद के नाम से भी जाना जाता है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार इस्लाम के तीसरे महीने में रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारिख को हर साल ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का दिन होता है. 571 ई. में 12वीं रबी-अव्वल के दिन मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था. पैगबंर मोहम्मद साहब को इस्लाम धर्म का दुनिया में संस्थापक माना जाता है. इस दिन इस्लाम धर्म के मानने वाले लोग अपने गावों और शहरों में जलसा का आयोजन करे हैं. इस जलसे में पैगंबर साहब के द्धारा दिए गए पवित्र संदेशो को लोगों के बीच इस्लाम के जानकार रखते हैं. लोगों के पैगंबर साहब के बताई हुई रास्तों पर चलने का उपदेश दिया जाता है. इस दिन लोग शांत मन से पवित्र कुरान शरीफ की अपने घरों में तिलावत करते हैं. मस्जिदों में लोग नमाज के पढ़ने के बाद पैगंबर मोहम्मद साहब के नाम लेकर अपनी मगफिरत की दुआं मागते हैं अल्लाह से.

जानिए कौन थे पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब- सबसे पहले आप जान लीजिए कि पैगंबर मोहम्मद साहब का पूरा नाम, हजरत मोहम्मद सल्लललाहु अलैहि वसल्लम था. वह मुस्लमानों के आखिरी पैगंबर हैं. मोहम्मद साबह का जन्म सउदी अरब के मक्का शहर में हुआ था. इनके पिता का नाम मोहम्मद इब्र अब्दुल्लाह इब्र मुत्तलिब और माता का नाम बीबी आमिना था.

हदीसों में बताया जाता है कि 610 ई. में मक्का के पास हीरा नाम के गुफा में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. आगे चलकर मोहम्मद साबह ने इस्लाम धर्म की पवित्र ग्रंथ कुरान शरीफ की लोगों को उपदेश दिया. हजरत मोहम्मद साहब ने दुनिया भर के लोगों को इस्लाम को अपनाने का उपदेश दिया और अपनी जीवन को पवित्र ग्रंथ कुरान शरीफ में लिखि हुई बातों पर ढ़ालने का कहा था.

इस साल 10 नवंबर को है ईद-ए-मिलाद-उन-नबी
इस साल 10 नवंबर को है ईद-ए-मिलाद-उन-नबी
इस साल 10 नवंबर को है ईद-ए-मिलाद-उन-नबी

Also Read- Lal Krishna Advani On Ayodhya Ram Mandir Babri Verdict: अयोध्या राम मंदिर पर देशव्यापी आंदोलन चलाने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा- जिंदगी भर का सपना पूरा हुआ

BJP Devendra Fadnavis Invited to Form Mahrashtra Government: महाराष्ट्र के राज्यपाल का देवेंद्र फड़णवीस की बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता, 11 नवंबर शाम 8 बजे फ्लोर टेस्ट, सोमवार को ही शपथ

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के दिन इस्लाम को मानने वालें अपने घरों में और मस्जिदों मे नमाज पढ़ते हैं और आसमानी ग्रंथ कुरान शरीफ की तिलावत करते हैं. हजरत मोहम्मद साहब के संदेशो को लोग जलसा में पढ़कर सुनाते हैं. सुन्नी मुस्लमान इस दिन हजरत मोहम्मद के पवित्र वचनों को पढ़ते हैं और याद करते हैं. वहीं, शिया मुस्लमान मोहम्मद साहब को अपना उत्तराधिकारी मानते हैं. इस दिन नामज और मोहम्मद साहब के संदेशों को पढ़ने के साथ-साथ गरीबों को खाना खिलाया जाता है, इसके साथ ही अपने हैसियत के हिसाब से लोग दान-पुण्य भी करते हैं.

 

Also Read- Ayodhya Ram Temple Trust Members Prediction: सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले से बनेगा राम मंदिर ट्रस्ट, क्या पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, एलके आडवाणी, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, कल्याण सिंह बनेंगे ट्रस्टी मेंबर ?

UP Sunni Central Waqf Board on SC Ayodhya Verdict: अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का समर्थन, कहा- पुर्नविचार याचिका पर कोई विचार नहीं

UP Sunni Central Waqf Board on SC Ayodhya Verdict: अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का समर्थन, कहा- पुर्नविचार याचिका पर कोई विचार नहीं