नई दिल्ली. दीपों के त्योहार दीवाली के एक दिन बाद भाई दूज का त्योहार आता है. ये त्यौहार भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है. हर हिंदू त्योहार की तरह इस दिन की भी अपनी अलग कहानी है यानी एक ऐसी पौराणिक कथा जिसके लिए इस दिन को मनाया जाता है. आइये हम आपको बताते हैं क्या है वो पौराणिक कथा- दरअसल संज्ञा से सूर्य की दो संतान थीं पुत्र यमराज और पुत्री यमुना. वहीं सूर्य का तेज बर्दास्त न कर पाने की स्थिति में संज्ञा ने अपनी छायामूर्ति बनाई और दोनों बच्चों के उन्हें सौंपकर चली गई. हालांकि छाया को यम और यमुना से कोई प्रेम नहीं था लेकिन दोनों भाई बहनों में बहुत प्यार था.

बेहद लगाव के बावजूद यमराज बहुत कामकाज का कारण अपनी बहन से मिलने का वक्त नहीं निकाल पाते थे. एक दिन वे लंबे समय बाद बहन की नाराजगी दूर करने पहुंचे यमराज को देखकर यमुना खुशी से झूम उठीं. यमुना ने बाई का खूब स्वागत किया और ढेरों व्यंजन बनाकर उन्हें खिलाए. यमराज को इतना अधिक प्रेम आदर और सत्कार की आशा न थी.

ऐसे में उन्होंने अपनी बहन यमुना को विविध भेंट समर्पित की. जब वे जाने लगे तो बहन यमुना से बोले अपनी इच्छा का वरदान मुझसे मांग लो. इसपर यमुना ने कहा कि अगर कोई वरदान ही मुझे देना है तो वचन दीजिए कि आज के दिन प्रतिवर्ष आप मेरे यहां आया करेंगे और मेरा आतिथ्य स्वीकार करेंगे.यमराज ने बहन से वादा किया. तब से आजतक इस दिन को भाईदूज के रूप में मनाया जाता है. इसे भाई बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है.

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