नई दिल्ली. देशभर में 23 और 24 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. जन्माष्टमी से दो दिन पूर्व भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की पष्ठी को हलछठ का त्योहार भी मनाया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलरामजी के जन्मोत्सव के मौके पर हरछठ पर्व मनाते हैं जिसे बलराम जयंती और हलषष्ठी भी कहा जाता है. इस साल हलछठ का त्योहार 21 अगस्त बुधवार को पड़ रहा है. हलछठ के मौके पर महिलाओं के व्रत करने का विशेष महत्व बताया गया है. जानिए हलछठ पर व्रत का महत्व और पूजा विधि.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बलरामजी का जन्म श्रीकृष्ण के जन्म से पहले भाद्रपद्र के कृष्णपक्ष की पष्ठी के दिन हुआ था. इसी वजह से हलछठ के मौके पर व्रत और पूजन का विधान बताया गया है. इस दिन खासतौर पर पुत्रवती महिलाएं अपने संतान की लंबी उम्र की कामना करते हुए हलछठ का व्रत करती हैं. कहा जाता है कि बलरामजी का अस्त्र था इसलिए महिलाएं त्योहार के मौके पर हल की पूजा करती हैं. साथ ही पुत्र की सलामती के लिए निर्जला व्रत भी करती हैं.

हलछठ के व्रत नियम

बलराम जयंती का व्रत करने वाली महिलाओं को कई बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. जैसे हरछठ के व्रत में सिर्फ भैंस के दूध का इस्तेमाल किया जाता है. इस दिन आप भूलकर भी गाय के दूध से निर्मित किसी चीज का प्रयोग नहीं कर सकते हैं. इस दिन हल की पूजा की जाती है इसलिए कुछ भी ऐसी वस्तु नहीं खा सकते हैं जो हल से जोतकर न पैदा न हुई हो. साथ ही इस दिन आप फल भी नहीं खा सकते हैं. व्रत का समापन महिलाएं भैंस के दूध से बनी दही औ सूखे फूल को पलाश के पत्ते पर खाकर किया जाता है. क्योंकि हलछठ के दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को पसही के चावल या महुए का लाटा बनाकर पारण करने की मान्यता है.

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