नई दिल्लीः  Govardhan Puja 2018: प्रकाश के पर्व दिवाली के अगले दिन यानि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन गोवर्धन पूजा की जाती है जिसका हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है. गोवर्धन पूजा का दूसरा नाम अन्नकूट पूजा भी है. इसमें दिवाली के अगले दिन लोग अपने घर के आंगन में गोबर का गोवर्धन पर्वत बनाकर या उसका चित्र बनाकर भगवान गोवर्धन की विशेष पूजा करते हैं. पूजा करने के बाद गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की जाती है और पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद के रूप में अन्नकूट का भोग लगाया जाता है और उसको प्रसाद के तौर पर वितरित किया जाता है.

गोवर्धन पूजा के दिन भक्त भगवान कृष्‍ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करते हैं. इस दिन 56 भोग यानि 56 तरह के पकवान बनाकर श्रीकृष्‍ण को भोग लगाया जाता है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक आज यानि गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्‍ण ने देवताओं के राजा इन्‍द्र के घमंड को तोड़ते हुए गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी. जिसके बाद से दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाने लगी.

गोवर्धन पूजा 2018 कथा:

हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने देखा की ब्रज के लोग देवताओं के राजा इंद्र की पूजा कर रहे हैं जिसके बाद उन्होंने अपने घर में अपनी मां को इंद्रदेव की पूजा करते हुए देखा. इसके बाद उन्होंने अपनी मां से प्रश्न किया किया कि ब्रज के लोग इंद्रदेव की पूजा क्यों करते हैं. जिसके उत्तर में उनकी मां ने बताया कि इंद्रदेव जब प्रसन्न होते हैं तो वह वर्षा होती है जिससे हमारे खेतों में अन्न की पैदावार बढ़ती है और हमारी गायों को चारा मिल पाता है. इस प्रश्न को सुनने के बाद श्रीकृष्ण ने अपनी मां से कहा कि अगर ऐसा है तो हमें इंद्रदेव की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गायों को चारा वहीं से मिलता है और वो वहीं जाकर चरती है.

जिसके बाद ब्रजवासियों ने श्रीकृष्ण की बातों से सहमत होकर इंद्रदेव की पूजा छोड़ गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी. जिसके बाद ब्रज के लोगों द्वारा ऐसा करना इंद्रदेव को अपना अपमान लगा और क्रोधित होकर उन्होंने भयानक बारिश शुरू कर दी. इंद्रदेव द्वारा की जा रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने समूचे गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठा लिया और ब्रज के लोगों की रक्षा की.

जब इंद्रदेव को श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की बात पता चली और ये भी पता चला कि असल में भगवान विष्णु ही धरती पर श्रीकृष्ण अवतार में अवतरित हुए हैं. जिसके बाद उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी. जिसके बाद से प्रत्येक वर्ष लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं.

Govardhan Puja 2018: जानिए गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त, समय, विधि और महत्व

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