नई दिल्ली. अल्लाह की नेमतों और बरकतों से भरपूर इस्लाम के पवित्र महीने रमजान के बाद 25 मई को देशभर में को ईद उल फितर का त्योहार मनाया जाएगा. हालांकि, इस बार कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों को ईद की नमाज अपने घरों में ही अदा करनी होगी. ईद का त्योहार खुशियों का त्योहार जिसे रमजान के पूरे होने की खुशी में मनाया जाता है.

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, ईद का त्योहार 10वें शव्वाल महीने के पहले दिन मनाया जाता है जिसे मीठी ईद के नाम से भी पुकारा जाता है. ईद की नमाज में दुनिया में चैन और अमन के लिए दुआ की जाती है. कोरोना के हालातों से अलग ईद के दिन लोग घर जाकर बधाई देते हैं और एक-दूसरे को सेंवईं परोसकर मुंह मीठा करते हैं.

क्यों मनाया जाता है ईद उल फितर का त्योहार
इस्लामिक यानी हिजरी कैलेंडर के अनुसार ईद का त्योहार साल में 2 बार ईद उल फितर और ईद उल अजहा (बकरीद) के रूप में मनाया जाता है. इस्लामिक कैलेंडर के नौंवे महीने रमजान के 29 या 30 रोजे ( चांद के अनुसार) पूरे होने के बाद चांद देखा जाता है और उसके अगले दिन ईद मनाई जाती है.

इतिहास की मानें तो युद्ध ए बद्र के बाद ईद मनाने की शुरुआत हुई थी. दरअसल पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब ने बद्र के युद्ध में फतह हासिल की जिसकी खुशी में लोगों ने ईद का त्योहार मनाना शुरू किया.

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