Diwali 2020 Date Calendar: भारत के कई हिस्सों में दीपावली के नाम से मशहूर दिवाली का त्योहार हिंदुओं के प्रमुख त्योहार में से एक है. पांच दिनों तक चलने वाला दिवाली का यह त्योहार धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होता है. महाराष्ट्र में दिवाली का त्योहार भारत के अन्य भागों की अपेक्षा एक दिन पहले गोवत्स द्वादशी से शुरु हो जाता है. पांच दिनों तक चलने वाले इस त्योहार श्री लक्ष्मी के अलावा अन्य देवी देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है. दिवाली को रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है. जैन धर्म के लोग इस महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं. इस दिन लोग अपने घरों का कोना-कोना साफ करते हैं, नये कपड़े पहनते हैं. मिठाइयों के उपहार एक दूसरे को बांटते हैं, एक दूसरे से मिलते हैं. घर में सुंदर रंगोली बनाई जाती है, दिए जलाये जाते हैं और आतिशबाजी की जाती है. दिवाली पूजा को लक्ष्मी पूजा, लक्ष्मी गणेश पूजा के नाम से भी जानते हैं. पांच दिन तक चलने वाले इस त्योहार में पहले गोवत्स द्वादशी, दूसरे दिन धनतेरस/ धन्वन्तरि त्रयोदशी, तीसरे दिन नरक चतुर्दशी बड़ी दीपवाली, चौथे दिन छोटी दीपावली, गोवर्धन पूजा और पांचवे दिन गुजराती नववर्ष, भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है.

दिवाली पूजा न सिर्फ घरों में बल्कि ऑफिसों में भी धूम धाम से मनाई जाती है. हिंदू व्यापारियों के लिए दिवाली का दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है. दिवाली के दिन पेन, लेखनी और नए चेक बुक की भी पूजा की जाती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार लेखनी और दावात की पूजा देवी महाकाली सरस्वती को खुश करने के लिए की जाती है. वहीं बही खाते और अन्य चीजों की पूजा देवी लक्ष्मी को खुश करे के लिए की जाती है. मान्यता है कि ऐसा करने वाले पर माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की कृपा हमेशा बनी रहती है.

दिवाली पूजा सूर्यास्त के बा की जाएगा. सूर्यास्त के बाद के समय को प्रदोष का काल कहा जाता है. मान्यता है कि जब अमावस्या तिथि प्रदोश के काल में प्रवेश करती है तो वह समय दिवाली पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. दिवाली पूजा के लिए इससे अच्छा मुहूर्त कोई और नहीं होता है. दिवाली के दिन शाम के सभी सभी लोग अपने घर में लक्ष्मी की आराधना करने के बाद घरों को रोशनी से सजाते है. पूजा संपन्न होने पर सभी एक दूसरे को प्रसाद और उपहार बांटते है साथ ही ईश्वर से जीवन में खुशियों की कामना करते हैं. अंत में पटाखों और विभिन्न खेलों से सभी दिवाली की मस्ती में डूब जाते हैं.

देखिए पांच दिन तक मनाया जाने वाले दिवाली 2020 त्योहार का पूरा कैलेंडर-

दिवाली पहला दिन- गोवत्स द्वादशी तारीख, शुभ मुहूर्त

दिवाली गोवत्स द्वादशी का त्योहार धनतरेस के एक दिन पहले मनाया जाता है. गोवत्स द्वावदशी के दिन गायों की पूजा की जाती है. इस दिन आटे से बने प्रसाद को गाय को खिलाया जाता है. गोवत्स द्वादशी को नंदिनी व्रत के नाम से माना जाता है. गोवत्व द्वादशी 12 नवंबर 2020 को पूरे देश में धूम धाम से मनाई जाएगी. गोवत्स द्वादशी का शुभ महूर्त 6 बजकर एक मिनट से शुरु होगा और 8 बजकर 34 मिनट पर खत्म होगा. वहीं द्वादशी तिथि 12 नवंबर 2020 को 12 बजकर 40 मिनट से शुरु होगी और 9 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी.

दिवाली दूसरा दिन- धनतेरस/ धन्वन्तरि त्रयोदशी तारीख, शुभ मुहूर्त

धन्वन्तरि त्रयोदशी के नाम से जाने जाने वाले धनतेरस के त्योहार के देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है. धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर 2020 को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा. धनतरेस का शुभ मुहूर्त 6 बजकर 1 मिनट से शुरु होगा और 8 बजकर 33 मिनट पर खत्म होगा. धन्वन्तरि त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 नवंबर 2020 को 9 बजकर 30 मिनट और समाप्ति 13 नवंबर 2020 को 5 बजकर 55 मिनट पर होगी.

दिवाली तीसरा दिन- नरक चतुर्दशी/बड़ी दिवाली तारीख, शुभ मुहूर्त

बड़ी दिवाली के नाम से जाने जानेवाने नरक चतुर्दशी के त्योहार के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और नरक जाने से बचाने की कामना की जाती है. नरक चतुर्दशी का त्योहार 13 नवंबर 2020 को देश भर में मनाया जाएगा. नरक चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 33 मिनट से शुरु होगा और सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगा. नरक चतुर्दशी तिथि का आरंभ 13 नवंबर 2020 को शाम 5 बजकर 59 से होगा और समाप्ति 14 नवंबर 2020 2 बजकर 17 मिनट पर होगी.

दिवाली चौथा दिन- छोटी दिवाली, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट का तारीख, शुभ मुहूर्त

दिवाली के चोथे दिन पूरे देश में छोटी दिवाली और गोवर्धन पूजा, अन्नकूट पूजा का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन इंद्र पर भगवान कृष्ण की विजय की तौर पर भी मनाया जाता है. गोवर्धन पूजा का शुभ मुहर्त 15 नवंबर 2020 को शाम 3 बजकर 45 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजे समाप्त होगा.

दिवाली पांचवा दिन- भाई दूज, तारीख, शुभ मुहूर्त

दिवाली के त्योहार के पांचवे दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन बहन अपने भाईयों को टीका लगाकर उनकी लंबी जिंदगी और खुशी की कामना करती हैं और भाई बहनों की सुरक्षा का वचन देते हैं. साथ ही कुछ उपहार भी देते हैं. भाई दूज का शुभ मुहूर्त 16 नवंबर 2020 को दोपहर 1 बजकर 31 मिनट से शुरू होगा और 3 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगा.

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