नई दिल्ली: Dev Uthani Ekadashi 2020: कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रुप में मनाया जाता हैं। देवउठनी एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्यक्रम शुरु हो जाते हैं। वहीं कहा जाता हैं कि इस दिन उपवास रखने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। पौराणिक मान्यता अनुसार देवउठनी एकादशी पर तुलसी व शालिग्राम का विवाह भी किया जाता हैं। इसी कारण देवउठनी एकादशी बड़ी एकादशी के रुप में मनाई जाती हैं। इस दिन कई शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती हैं।

पौराणिक मान्यता अनुसार देखा जाए तो देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2020) के दिन तुलसी का शालिग्राम जी के साथ विवाह किया जाता हैं। वहीं महिलाएं घर पर तुलसी जी के महंदी, फूल, चंदन व सुहाग की निशानी सिंदूर, चूंदड़ी आदि लगा पूजन करती हैं। इस प्रकार देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2020) पर किसी भी नए कार्य की शुरुआत शुभ रहती हैं। वहीं हमेशा आपके कार्य में बरकत बनीं रहती हैं।

देवउठनी एकादशी पूजा विधि (Dev Uthani Ekadashi 2020 puja vidhi)

-सबसे पहले उचित दिशा का चयन करें।

-पूजा स्थल को पूर्ण रुप से स्वच्छ कर लें।

-अब पूजा स्थल पर गन्ने का मंडप लगाए।

-साथ ही भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।

-भगवान विष्णु के मूली, सिंघाड़ा, बेर, आंवला, सीताफल व ऋतु फल अर्पित करें।

-अब भगवान विष्णु के मिठाई का भोग लगाकर पूजा करें।

-भगवान विष्णु के मंत्र के जाप के साथ ही पूजा सम्पन्न करें।

पौराणिक कथा देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2020 importance)

शास्त्रों की मुताबिक देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागते हैं और इसी के मांगलिक कार्यक्रम शुरु हो जाते हैं। कहा जाता हैं कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान करने से आपके घर में सदैव खुशहाली बनी रहती हैं। साथ ही आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर विष्णु भगवान के सोने के साथ ही मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं। इसी कारण देवउठनी एकादशी बड़ी ग्यारस में गिनी जाती हैं और इस दिन घर में दीपक जला भगवान विष्णु व तुलसी को पूजा जाता हैं।

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Dev Uthani Ekadashi 2020: देवउठनी एकादशी 2020 पूजा मुहूर्त व भगवान विष्णु पूजा संपूर्ण विधि

 

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