नई दिल्ली. देव दीपावली का त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस देव दीपावली त्योहार को त्रिपुरी के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुर नाम के राक्षस का अंत किया था. इसलिए इस दिन देवता अपनी खुशी को दिखाने के लिए घाट पर जा कर दीपक जलाते हैं. इसी वजह से इस दिन को देव दीपावली के रूप से मनाया जाता है. तो आइए जानते हैं देव दीपावली कब मनाया जाएगा, देव दीपावली का शुभ मुहूर्त, देव दीपावली का महत्व और पूजा-विधि.

देव दीपावली तिथि –
इस साल देव दीपावली 12 नवंबर 2019 को मनाई जाएगी.

देव दीपावली शुभ मुहूर्त-
देव दीपावली प्रदोष काल शुभ मुहूर्त – शाम 5 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 48 मिनट तक 11 नवंबर 2019
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- शाम 6 बजकर 2 मिनट से 11 नवंबर 2019
पूर्णिमा तिथि समाप्त – अगले दिन शाम 7 बजकर 4 मिनट तक 12 नवंबर 2019

देव दीपावली का महत्व-
देव दीपावली कार्तिक पूर्णमा को मनाई जाती है. जिस तरह मनुष्य दीए जलाकर दिवाली का पर्व मनाते हैं. ठीक उसी प्रकार देवतागण भी दीप जलाकर दीपावली का पर्व मनाते हैं. देव दीपावली दिवाली के 15 दिन बाद मनाई जाती है. दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है और देव दीपावली का पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार देव दीपावली के दिन सभी देवता गंगा नदी के घाट पर आकर दीप जलाकर अपनी प्रसन्नता दिखाते हैं. इस दिन की एक और कहानी भी है. त्रिपुरासुर राक्षस ने ब्रह्मा जी की तपस्या करके उनका वरदान पा लिया. इसके बाद वरदान पा कर तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था. इसके बाद सभी देवताओं ने भगवान शिव से उसका अंत करने के लिए कहा. भगनाव शिव ने सभी देनवताओं के विनती के बाद त्रिपरासुर से युद्ध करके उसका अंत कर दिया. इसलिए देव दीपावली के दिन पूजा-अर्चना का विशेष महत्व दिया जाता है.

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देव दीपावली पूजा-विधि-
1. देव दीपावली के दिन गंगा स्नान को अधिक महत्व दिया जाता है. इसलिए इस दिन गंगा स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें.
2. इसके बाद भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। देव दीपावली के दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है.
3. इस दिन शाम के समय भगवान शिव को पुष्प, घी, नैवेद्य, बेलपत्र आदि अर्पित करें.
4. इसके बाद भगवान शिव के मंत्र ‘ऊं नम: शिवाय’ या ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बेकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धूनान् मृत्योवर्मुक्षीय मामृतात्ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !! मंत्र का जाप करना इस दिन शुभ रहता है। इसलिए इस मंत्र का जाप अवश्य करें.
5. इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, नैवेद्य, पीले वस्त्र, पीली मिठाई अर्पित करें.
6. इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र और ऊं नम : नारायण या नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युगधारिणे नम:।। मंत्र का जाप करें.
7. इसके बाद भगवान शिव और भगवान भगवान विष्णु को मिष्ठान का भोग लगाएं और उनकी विधिवत पूजा करें.
8. इसके बाद भगवान शिव और भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारें. इसके बाद तुलसी के नीचे दीपक जलाएं.
9. अंत में गंगा घाट पर जाकर दीपक अवश्य जलाएं. क्योंकि इस दिन गंगा घाट पर दीपक जलाने से सभी देवताओं का आर्शीवाद प्राप्त होता  है.
10. यदि आप गंगा नदी पर जाकर स्नान नहीं कर सकते तो आप घर पर ही गंगा स्नान करें और इसी प्रकार से पूजा करें.

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