नई दिल्ली. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की ​द्वितीया तिथि को यम द्वितीया भी मनाई जाती जो देश में भाई दूज के दिन होती है. इस दिन चित्रगुप्त महाराज की पूजा होती है. अधिकतर लोग इस दिन लेखनी या कलम को चित्रगुप्त महाराज मानकर पूजा करते हैं, दिवाली के बाद होने वाली इस पूजा को भी लोग अच्छी तरह से करते हैं. क्योंकि चित्रगुप्त महाराज देवताओं के लेखपाल कहे जाते हैं और वह पृथ्वी पर रह रहे मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा भी करते हैं.

पूजा विधि

पहले तो आपको जहां पूजा करनी है उस जगह को पानी से धोकर साफ करें. इसके बाद एक चौकी रखें और भगवान चित्रगुप्त की फोटो या कलेंडर रखें. इसके एक घी का दीपक भी जलाएं और एक थाली में रोली, हल्दी, फूल, पांच फल, पांच मिठाई, एक पान का पत्ता, अगरबत्ती रखें. अब परिवार के सभी सदस्य मिलकर चित्रगुप्त महाराज की पूजा करें और एक सफेद कागज पर रोली से स्वास्तिक बनाएं. अब इसके नीचे पांच देवी-देवताओं के नाम लिखें. इसके बाद थाली में रखे सामान को भगवान चित्रगुप्त को अर्पित करें.

मंत्र
चित्र इद राजा राजका इदन्यके यके सरस्वतीमनु।
पर्जन्य इव ततनद धि वर्ष्ट्या सहस्रमयुता ददत

भगवान ब्रह्मा के विभिन्न संरचनाओं में कई पुत्र और पुत्रियाँ थीं, जिनमें उनके मन से पैदा हुए कई द्रष्टा, जैसे वशिष्ठ, नारद और अत्रि, और उनके शरीर से पैदा हुए कई पुत्र, जैसे कि धर्म, भ्रम, वासना, मृत्यु और भरत. चित्रगुप्त के जन्म की कहानी अलग-अलग तरीकों से संबंधित है, लेकिन वह लगभग हमेशा भगवान ब्रह्मा के अन्य बच्चों से अलग ढंग से है. चित्रगुप्त के निर्माण मिथक के एक लोकप्रिय संस्करण में, यह कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने मृतकों के काम को यम देवता को दिया जिसे धर्मराज या यमराज के नाम से भी जाना जाता है. यम कभी-कभी भ्रमित हो जाते थे जब मृत आत्माएं उनके पास आती थीं,और कभी-कभी गलत आत्माओं को स्वर्ग या नरक में भेज देते थे.

भगवान ब्रह्मा यम के लिए इस समस्या का समाधान चाहते थे और कई हजारों वर्षों तक ध्यान में बैठे रहे. अंत में उन्होंने अपनी आँखें खोली, और एक आदमी उसके सामने कलम और कागज लेकर खड़ा था. इनके सामने एक बच्चा कलम और किताब लेकर खड़ा था, फिर बाद में ब्रह्मा ने घोषणा की कि उनके बच्चे हमेशा के लिए कायस्थ के रूप में जाने जाएंगे. चित्रगुप्त को कभी-कभी अक्षरों का उपयोग करने वाले पहले व्यक्ति के रूप में भी संदर्भित किया जाता है और गरुड़ पुराण में इसका जिक्र भी है.

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