नई दिल्ली. छठ पूजा को लेकर कई सारी बातें ध्यान में रखी जाती है. पूरे परिवार को तामसिक भोजन से परहेज करना होता है. पूरे परिवार को सात्विकता और स्वच्छता का पालन करना होता है. छठ को अत्यंत सफाई और सात्विकता का व्रत माना जाता है. इसलिए इसमें सबसे बड़ी सावधानी यही मानी जाती है कि इस दौरान साफ-सफाई का खास ख्याएल रखा जाना चाहिए. किसी भी तरह की गलती से छठ पूजा में गलती पूजा का फल नहीं मिलता है.

प्रसाद के लिए बांस की तीन टोकरी, बांस या, पीतल के तीन सूप, लोटा, थाली, गिलास, नारियल, साड़ी-कुर्ता पजामा, गन्ना पत्तों के साथ, हल्दी अदरक हरा पौधा, सुथनी, शकरकंदी, डगरा, हल्दी और अदरक का पौधा, नाशपाती, नींबू बड़ा, शहद की डिब्बी, पान सुपारी, कैराव, सिंदूर, कपूर, कुमकुम, अक्षत के लिए चावल, चन्दन, ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लड्डू/लड्डुआ, सेब, सिंघाड़ा, मूली आदि का होना जरुरी है.

व्रती छठ पूजा के दौरान नए कपड़े पहनती हैं , छठ पूजा के चारों दिन व्रती जमीन पर चटाई पर सोती हैं. छठ व्रती के साथ-साथ घर के बाकी सदस्य भी छठ पूजा के दौरान प्याज, लहसुन और मांस-मछली का सेवन करना मना होता है. पूजा के लिए बांस से बने सूप और टोकरी का इस्तेमाल किया जाता है. छठ पूजा में गुड़ और गेंहू के आटे के ठेकुआ, फलों में केला और गन्ना ध्यान रखा जाता है.

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