नई दिल्ली. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 10 नवंबर, बुधवार को थी। छठ पर्व की शुरुआत 8 नवंबर को नहाए-खाय के साथ हुई थी। 10 नवंबर को छठ पर्व का दूसरा दिन खरना मनाया गया। 10 नवंबर को डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया और 11 नवंबर यानी आज को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पर्व संपन्न हुआ।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 10 नवंबर, बुधवार को थी। छठ पर्व की शुरुआत 8 नवंबर को नहाए-खाय के साथ हुई थी। 10 नवंबर को छठ पर्व का दूसरा दिन खरना मनाया गया। 10 नवंबर को डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया और 11 नवंबर यानी आज को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पर्व संपन्न होगा।

बिहार में बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य का समय शाम 4:30 से 5:26 बजे तक रहा। गुरुवार सुबह उदयगामी सूर्य को अर्घ्य का समय 6:34 बजे है।

छठ पूजा के लिए इन चीजों की पड़ती है जरूरत

प्रसाद रखने के लिए बांस की दो तीन बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने तीन सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए ग्लास, नए वस्त्र साड़ी-कुर्ता पजामा, चावल, लाल सिंदूर, धूप और बड़ा दीपक, पानी वाला नारियल, गन्ना जिसमें पत्ता लगा हो, सुथनी और शकरकंदी, हल्दी और अदरक का पौधा हरा हो तो अच्छा, नाशपाती और बड़ा वाला मीठा नींबू, जिसे टाब भी कहते हैं, शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी, कैराव, कपूर, कुमकुम, चन्दन, मिठाई।

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