नई दिल्ली. छठ महापर्व रविवार यानि 11 नवंबर से शुरू हो रहा है. सभी लोगों ने छठ पूजा की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. छठ पर्व का त्योहार 4 दिनों का होता है.चार दिनों तक चलने वाली छठ पूजा में भगवान सूर्य की उपासना का बहुत ज्यादा महत्व है. छठ पूजा के पहले दिन 11 नंबवर को नहाय खाय होता है. इसके बाद 12 नवंबर को खरना मनाया जाएगा. जबकि 13 नवंबर को सांझ का अर्ध्य है और व्रत का अंतिम दिन यानी 14 नवंबर को भोर का अर्ध्य है. तो इससे पहले आइए, जानते हैं छठ पूजा के महत्व और विधि-विधान के बारे में…

इस बार नहाए खाए 11 नवंबर को है. इश दिन महिलाएं और पुरुष नदियों में स्नान करते हैं. छठ रीति रिवाज के मुताबिक इस दिन चावल, चने की दाल आदि बनाए जाते हैं. विशेषकर इस पर्व पर इस दिन खास रूप से कद्दू की सब्जी और पकवान इत्यादि बनाए जाते हैं. इसलिए इस दिन को कदुआ भात भी कहते हैं.

छठ के दूसरे दिन यानि इस बार 12 नवंबर को खरना है. इस दिन से महिलाएं और पुरुष छठ पर्व का उपवास रखना शुरू करते हैं, इन्हें छठ व्रती कहा जाता है. छठ पर्व के अनुसार इसी दिन शाम के समय प्रसाद बनाया जाता है. प्रसाद में चावल, दूध के पकवान, ठेकुआ इत्यादि बनाया जाता है. इसके साथ साथ ही फल वह सब्जियों से पूजा की जाती है.

वहीं छठ पर्व के तीसरे दिन छठ व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत करते हैं. छठ की शाम के पूजन की तैयारियां करते हैं. इस दिन नदी, तालाब में खड़े होकर ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. फिर पूजा के बाद अगली सुबह की पूजा के लिए तैयारियां की जाती है. हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक सूर्य को जल देना बेहद अहम है. छठ पूजा के पावन पर्व पर ढलते और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से कई पापों का नाश होता है.

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