नई दिल्ली. इस समय देशभर में त्योहारों का सीजन चल रहा है. इस साल 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक महापर्व छठ पूजा मनाया जाएगा. छठ पूजा में सूर्य भगवान का अराधना किया जाता है. इस त्योहार को एक साल में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत्र मास में और दूसरी बार कार्तिक मास में मनाया जाता है. चैत्र के महीने में शुक्ल पक्ष षष्ठी होने वाले छठ को चैती छठ और कार्तिक के महीने में मनाये जाने वाले छठ को कार्तिकी छठ कहा जाता है. महापर्व छठ पूजा परिवारिक सुख-शांति और समृद्धि प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है.

महाभारत युद्ध के महान योद्धाओं में से कर्ण एक है. कर्ण को महाभारत का महानायक माना जाता है. ये महाभारत के युद्ध में सर्वश्रेष्ठ धनुष धारी रहे हैं. इनका मुकाबला तो अर्जुन भी नहीं कर पाए थे. भगवान श्री कृष्ण और भगवान परशुराम ने स्वंय कर्ण की श्रेष्ठता स्वीकार किया था. कर्ण की मां कुन्ती थी, इनका जन्म कुन्ती का पांडव के साथ विवाह होने से पहले हुआ था. कर्ण दुर्योधन के सबसे अच्छे मित्र थे और उन्होंने महाभारत के युद्ध में अपने भाइयों के विरूद्ध लड़े थे. कर्ण को सूर्य पुत्र भी कहा जाता है.

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कर्ण के मित्र दुर्योधन ने अपना अंग देश यानी आज के भागलपुर का राजा बनाया था. भागलपुर बिहार राज्य में आता है. अंग राज के राजा कर्ण के विषय में एक पौराणिक कथा है कि, ये पांडवों की माता कुन्ती और सूर्य देव की संतान हैं. कर्ण अपना आराध्य देव सूर्य भगवान को मानते थे. पूरी विधि-विधान के साथ कर्ण पानी में जाकर सूर्य भगवान की आराधना करते थे और जरूरतमंदो को खूब दान देते थे. मान्यता है कि आज तक इनसे बड़ा कोई दानवीर है कोई, कभी-कभी तो ये अपनी जान की भी परवाह नहीं करते थे लोगों के मदद करने में.

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पौराणिक कथाओं के अनुसार मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल षष्ठी और सप्तमी के दिन कर्ण सू्र्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करते थे. अंग देश यानी आज के भागलपुर के लोग अपने राजा कर्ण से प्रभावित होकर सूर्य देव की पूजा करने लगे. समय बीतने के साथ-साथ इस पूजा का विस्तार पूरे बिहार और पूर्वांचल तक हो गया. आज के समय में हमलोग सूर्य उपासना के इस पर्व को महापर्व छठ पूजा के रूप में मनाते हैं.

 

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