नई दिल्ली. महापर्व छठ पूजा इस साल 31 अक्टूबर से लेकर 3 नवबंर तक मनाई जाएगी. छठ पूजा भारत के पूर्वी हिस्सें में मनाई जाती है. बिहार, झारखंड और पूर्वी यूपी में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है. इन राज्यों में छठ पूजा का महत्व सबसे बड़े त्योहार के रूप में है. इस पर्व का लोग पूरे साल बेसब्री से इंतेजार करते हैं. छठ पूजा के करने के लिए बिहार के लोग अपने घर वापस लौट आते हैं. इस दिन बड़े बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक नए कपड़े पहनते हैं. लोगों के बीच इस महापर्व का काफी उत्साह होता है. महापर्व छठ हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है.

महापर्व छठ पूजा की कब शुरूआत हुई, इसको लेकर चार पौराणिक कथाएं हैं- आइए जानते हैं पहली कथा के बारे में जिसमें महापर्व छठ पूजा करने की बात कही गई है. फिर उसी दिन से छठ पूजा मनाने की शुरूआत हुई- पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि भगवान राम ने सबसे पहले छठ पूजा किया था. अयोध्या नगरी में दशरथ नाम के राजा थे. जिनकी कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा नाम की पत्नियां थी. भगवान राम के विवाह के बाद राजा दशरथ ने राम जी का राज्याभिषेक करने की इच्छा जताई. इस पर देव लोक में देवताओं को चिंता होने लगी कि राम को राज्य मिल जाएगा तो फिर रावण का वध असंभव हो जाएगा.

देवताओं ने व्याकुल होकर देवी सरस्वती से उपाए करने की प्रार्थना की. देवी सरस्वती ने मन्थरा , जो कि रानी कैकयी की दासी थी, उसकी मती को फेर दिया. इसके बाद मन्थरा की सलाह पर रानी कैकयी कोपभवन में चली गई. राजा दशरथ जब रानी को कैकयी को मनाने आए तो उन्होंने वरदान मांगा कि भरत को राजा बनाया जाए और राम को 14 साल के लिए वनवास पर भेज दिया जाए. इसके बाद भगवान राम जी के साथ सीता और लक्ष्मण भी वनवास पर चले गए.

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मान्यता है कि भगवान राम सूर्यवंशी थे और इनके कुल देवता सूर्य भगवान थे. इसलिए भगवान राम और सीता जब वनवास खत्म होने और लंका से रावण वध करके अयोध्या वापस लौटे तो अपने कुलदेवता का आशीर्वाद पाने के लिए इन्होंने देवी सीता के साथ षष्ठी तिथि का व्रत रखा और सरयू नदी में डूबते सूर्य को फल, मिष्टान एवं अन्य वस्तुओं से अर्घ्य प्रदान किया. सप्तमी तिथि को भगवान राम ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद राजकाज संभालना शुरु किया। इसके बाद से आम जन भी सूर्यषष्ठी का पर्व हर साल मनाने लगे

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