नई दिल्ली. हिन्दू धर्म में चंद्रग्रहण की अपनी एक अलग मान्यता होती है. जिसमें कई तरह की बातों का खास ख्याल रखना पड़ता है. ऐसी कई बातें है जिसको लेकर जिसे नहीं करना चाहिए. कहा जाता है कि चंद्र ग्रहण हो या फिर सूर्य ग्रहण जितने जो भा मनुष्य ग्रहण के समय खाना खाते हैं. उन्हें वर्षों तक नरक में दुख भोगना पड़ता है. इस साल 17 जुलाई को सुबह 4.30 पर समाप्त होगा. लेकिन इस ग्रहण पर जानते है कि क्यों नहीं खाना चाहिए और अगर खाते हैं तो इसके क्या दुषप्रभाव होंगे. इस कारण इस चंद्र ग्रहण का सूतक 16 जुलाई को शाम को 4:30 बजे से प्रारंभ हो जाएगा. ऐसे में हम आपको बताने जा रहे है कि ग्रहण के दौरान इसके असर से बचने के लिए भूलकर भी रात को ये काम नहीं करने चाहिए

क्या ना करें
सनातन धर्म में ग्रहण को काफी अशुभ माना जाता है. चाहे वह चंद्र गहण हो या सूर्य ग्रहण हो. इस अशुभ समय में भोजन नहीं करना चाहिए. ग्रहण के दौरान भोजन करने की सख्त मनाही है. कहा ये भी जाता है कि अगर कोई भोजन करता है तो उसके सारे पूण्य नष्ट हो जाते हैं. इसके अलावा सिर पर तेल भी लगाने की मनाही होती है.

वैसे तो ग्रहण के दौरान खाने पिने को लेकर मनाही है लेकिन बुजुर्ग, छोटे बालक और रोगी को इसमें रियायत दी गई है. ये तीनों ग्रहण से 3 घंटे पहले भोजन कर सकते हैं. इसके अलावा ज्योतिषियों के मुताबिक ग्रहण के समय कीटाणु बहुत ही तेजी से फैलते हैं. ऐसे में भोजन के दौरान किया गया भोजन विष बन जाता है. जिससे आप बिमार हो सकते हैं साथ ही इस जन्म के साथ-साथ अगले कई जन्मों तक पिड़ा भोगना पड़ता है.

ग्रहण के समय पति और पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए. इस दौरान यदि गर्भ ठहर गया तो संतान विकलांग या मानसिक रूप से विक्षिप्त तक हो सकती है. ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए

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