नई दिल्ली. बसंत पंचमी यानी की सरस्वती पुजा इस साल 10 फरवरी को मनाएगा जाएगा. इस पूजा का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से सारी मनोकामना पूर्ण होती है. बसंत पंचमी की पौराणिक मान्यता है कि उस दिन मां सरस्वती प्रकट होती हैं और अपना आशिर्वाद देती हैं. हर साल बसंत पंचमी को एक त्वोहार के रुप में मनाया जाता है. इस दिन विद्धार्थी, कलाकार, संगीतकार और लेखक आदि मां सरस्वती की उपासना करते हैं. क्योंकि मां सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है इसलिए विद्धार्थी उनकी उपासना करते हैं. मां सरस्वती को सुरों की देवी भी कहा जाता है इसलिए संगीतकार मां सरस्वती की उपासना करते हैं ताकि स्वरसाधक मां सरस्वती की उपासना का उसने से स्वर प्रदान करे.

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी की पुजा का विशेष विधि विधान है. जिसके कई नियम है इस नियम से किए पूजा से मा सरस्वती प्रशन्न होती हैं और सारी मनोकामना पूर्ण करती हैं. बसंत पंचमी के दिन भूल कर भी कुछ ऐसे काम नहीं करने चाहिए यदि नियमों का पालन नहीं किया तो मां सरस्वती और पितृ रूठ सकते है.
1 बसंत पंचमी के दिन सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए.
2 बसंत पंचमी के दिन गलती से भी मांस मदिरा का सेवन ना करें, उस दिन सुबह जग कर स्नान के बाद पूजा करे उसके बाद सात्विक भोजन करे.
3 सरस्वती पूजा के दिन पेड़-पौधों को ना काटे इससे मां सरस्वती रुठ सकती हैं.
4 बसंत पंचमी के दिन बिना नहाए कुछ भी नहीं खाना चाहिए. इस दिन नदी, सरोवर या पास के तालाब में स्नान करना चाहिए और मां सरस्वती की पूजा अराधना के बाद ही कुछ खाना चाहिए.

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