नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित कुंभ में तीसरा शाही स्नान बसंत पंचमी के दिन किया जाएगा. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के पूजा का विशेष महत्व है. ऐसे में इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान का विशेष महत्व है. स्नान के साथ इस दिन दान का भी विशेष महत्व है. कुंभ में पहले दो शाही स्‍नान हो चुके हैं. 15 जनवरी को मकर संक्राति के दिन पहले शाही स्नान के साथ कुंभ की शुरुआत हो हुई थी. इसके बाद मौनी अमावस्या के दिन कुंभ में दूसरे शाही स्नान का आयोजन किया गया था.

बसंत पंचमी को स्नान का महत्व 

हिंदू धर्म में मान्यता है कि प्रयागराज संगम में सरस्वती अदृश्य रूप से प्रवाहित होती है. इस दिन संगम में स्नान करने से सरस्वती नदी में स्नान करने से मनुष्य के पाप दूर होते हैं. हिंदू धर्म ग्रंथों में सरस्वती नदी को पुण्य जननी के रूप में जाना जाता है. ऐसे में मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान और दान करने से न सिर्फ पाप दूर होते हैं बल्कि अविद्या का नाश होता है और मनुष्य में बुद्धि का विकास भी होता है. माना जाता है कि कुंभ में मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के बाद बसंत पंचमी के दिन भी संगम तट पर तीसरा शाही स्नान करता है तो उसे पूर्ण कुंभ का फल मिलता है.

बसंत पंचमी पर स्नान का मुहूर्त

इस बार रविवार, दस फरवरी को बसंत पंचमी के पर्व पर संगम तट पर कुंभ 2019 का तीसरा शाही स्नान किया जाएगा. रविवार को तीसरे शाही स्नान का विशेष मुहूर्त सुबह ब्रह्म मुहूर्त में दस बजकर 09 मिनट तक है.

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