नई दिल्ली. लोहड़ी और मकर संक्रांति के बाद त्योहारों की बहार आ जाती है. साल की शुरुआत ही इन दो बड़े त्योहारों से होती है. मकर संक्रांति और लोहड़ी के बाद बंसत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस साल बसंत पंचमी 22 जनवरी को है. बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के नाम से भी मनाया जाता है. जैसा की सभी को ज्ञात है कि सरस्वती मां को ज्ञान की देवी कहा जाता है. ये दिन बच्चे बड़े सभी के लिये शुभ रहता है.

हिंदू मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी हर साल माघ माह के पांचवे दिन मनाई जाती है. इसी वजह से इस त्योहार का नाम बंसत पंचमी पड़ा. बसंत का अर्थ होता है वसंत का माह और पंचमी का मतलब होता है पांचवा. इस त्योहार को उत्तर भारत में खूब धूमधाम से मनाया जाता है. वसंत के नजरिये से तो ये माह शुभ होता ही है वहीं ये दिन बच्चों का बच्चे के पढ़ने और लिखने के लिए बेहद ही शुभ मानते हैं. भारतीय संस्कृति में वसंत ऋतु को सबसे महत्वपूर्ण मौसम माना जाता है. इस मौसम में न तो चिलचिलाती धूप होती है, न सर्दी और न ही बारीश, वसंत में पेड़-पौधों पर ताजे फल और फूल खिलते हैं.

बसंत पंचमी की पूजा में सबसे खास महत्व होता है पीले रंग का. पीले रंग के फूल, पकवान और कपड़े दिन पहन कर पूजा की जाती है. मां सरस्वती को इस दिन पीले रंग के फूल चढ़ाए जाते हैं और पीले रंग के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. ऐसा इसीलिये होता है क्योंकि पीले रंग को वंसत का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि मां सरस्वती को पीला रंग बेहद प्रिय होता है. इसीलिये इस दिन पीले रंग का खास महत्व होता है.

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