नई दिल्ली: अनंत चतुर्दशी का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है. अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है. भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है. इस दिन वृत रखकर अनंत भगवान (भगवान विष्णु) और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामना पूरी हो जाती हैं. इस दिन भगवान की पूजा के बाद हाथ पर अनंत सूत्र बांधा जाता है. यह धागा कपास या रेशम से बना होता है और इसमें 14 गांठें होती है. भारत के कई राज्यों में अनंत चतुर्दशी के पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है.

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु भगवान की पूजा के साथ-साथ गणेश की भी पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन गणेश विसर्जन की वजह से अनंत चतुर्दशी का महत्व और भी बढ़ जाता है. इस वर्ष 12 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पूरे देशभर में मनाई जाएगी. अनंत चतुर्दशी के मौके पर कई जगहों पर झांकियां निकाली जाती हैं. इस दिन पूजा करने के बाद श्रद्धालु अपनी बाजू पर अनंत सूत्र बांधते हैं और सूत्र का अति महत्व होता है. मान्यता के अनुसार इस सूत्र की 14 गांठे बांधनी होती हैं. ये गांठें हरि द्वारा उत्पन्न 14 लोकों चौदह लोगों तल, अतल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुव आदि की रचना की उत्पति को दर्शाती हैं. 

Anant Chaturdashi 2019 Date Time: अनंत चतुर्दशी 2018 शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त : 12 सितंबर सुबह 06:04:17 बजे से 31:37:13 तक रहेगी

शुभ मुहूर्त की अवधि : 25 घंटे 32 मिनट

अनंत चतुर्दशी पूजा विधि

  • इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने का विधान है. बता दें कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा दोपहर के समय की जाती है. अनंत चतुर्दशी का वृत और पूजा करने की विधि इस प्रकार है.
  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करन के बाद व्रत संकल्प लें और पूजा घर में कलश को स्थापित करें.
  • कलश पर अष्टदल कमल की तरह बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करें. आप चाहें तो भगवान विष्णु की तस्वीर भी लगा सकते हैं.
  • इसके बाद एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र तैयार किया जाता है. इस धागे में चौदह गांठें लगाई जाती हैं.
  • गांठें लगाने के बाद अब इस सूत्र को भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखें.
  • अब भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की षोडशोपचार विधि से पूजा करें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें. पूजन के बाद अनंत सूत्र को अपनी बाजू पर बांध लें.

       इस मंत्र का करें उच्चारण–  अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव.
                                                 अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते..

  • पुरुष अनंत सूत्र को अपने दांये हाथ और महिलाएं बांये हाथ में बांधें. इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएंऔर सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें.

हिंदू घर्म ग्रंथों की मानें तो अनंत चतुर्दशी के  व्रत को अति शक्तिशाली माना गया है. ऐसी मान्यता है कि अगर कोई भी भक्त सच्चे दिल से इस व्रत को 14 सालों तक करें तो उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है.

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