नई दिल्ली. वैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है. अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त और आखा तीज भी कहा जाता है. हिंदू रिति रिवाज में इस दिन को काफी शुभ माना जाता है. इस दिन पूजा-पाठ करने से धन और संपत्ति के लिए कामना की जाती है. इस तिथि पर कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है. वैसाख के माह में इस दिन शादी, सगाई, जागरण या कोई शुभ मुहूर्त के काम किये जाते हैं.

अक्षय तृतीया का महत्व
हिंदू ज्योतिषी के मुताबिक, अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्मा जयंती भी होती है क्योंकि उन्होंने इसदिन से ही सृष्टि का निर्माण शुरू किया था. सृष्टि रचना की वजह से इस तिथि का महत्व बढ़ जाता है. कहा जाता है कि इस दिन से ही सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी. इन सभी के अलावा इसका एक महत्व ये होता है कि वेद व्यास के अनुरोध पर भगवान गणपति ने वेदों का लेखन कार्य भी आज ही के दिन से शुरू किया था. इस तिथि पर ही भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की जयंती भी है.

अक्षय तृतीया पूजन विधि:
अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय के पहले उठकर स्नान कर लें. इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करें. पूजा के लिए मंदिर में भगवान की प्रतिमा स्थापित करें, अगर पहले ही से विष्णु जी की प्रतिमा मौजूद हो तो गंगाजल से साफ करें और मंदिर की सफाई भी अवश्य करें. इस जरूरी पूजा में लक्ष्मी नारायण को सफेद कमल अथवा सफेद गुलाब या पीले गुलाब अर्पित केरं. साथ ही नैवेद्य में जौ या गेहूं का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल चढ़ाएं. अक्षय तृतीया में गहने खरीदने और पूजा की तरह दान करने का भी धर्म होता है. इस दिन ब्राह्मणों को फल, फूल, बर्तन तथा वस्त्र आदि दान के रूप में दें. इस दिन गरीब या जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाना भी शुभ होता है.

अक्षय तृतीया पर पूजा का शुभ मुहूर्त
सुबह 05: 56 से दोपहर 12:20 तक
खरीददारी करने का शुभ मुहूर्त
सुबह 05 बजकर 56 से आधी रात तक

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