नई दिल्ली. आज देशभर में गुरु नानक जयंती मनाई जा रही है. इसे गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है. गुरु पर्व को खास तौर पर सिख धर्म में मनाया जाता है. बता दें गुरु नानक सिख धर्म के पहले गुरु थे. गुरुनानक जी का जन्म तलवंडी सायभोय में हुआ था. 1947 में आजादी के बाद ये हिस्सा पाकिस्तान में चला गया. तलवंडी पाकिस्तान से लाहौर से 30 मील दूर है. गुरुनानक का जन्म गांव के कालूचंद्र और माता त्रिपाला के यहां हुआ. तभी घर में आए पंडित बताने में देर नहीं की कि ये कोई साधारण बालक नहीं बल्कि ईश्वर का रुप है. बताया जाता है कि गुरुनानक जी का शुरू से ही आध्यात्म में खूब जी लगता था. 
 
प्रचलित कथाओं के अनुसार बताया जाता है कि जब गुरु नानक जी को पंडित हरदयाल के पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा गया तो पंडित भी नानक जी के ज्ञान को देखकर स्तब्ध रह गए थे. ठीक इसी प्रकार गुरुनानक जी को मौलवी जी पास शिक्षा के लिए भेजा गया. फिर नानक ने अलफ, बे की सीफहीं के अर्थ सुना दिए, इसके बाद लोगों को ये निश्तित हो गया कि गुरु नानक ईश्वर का रुप है. गुरु नानक जी का मानना था कि बिना संन्यास लिए भी आध्यात्म को सही ठहराया. साथ ही गुरु नानक जी ने कभी भी मूर्ति पूजा को सही नहीं ठहराया. उनका मानना था कि ईश्वर को मानने के लिए आंतरिक मन साफ होना चाहिए.
 
गुरु नानक जंयती या गुरु पर्व पर तीन दिन पूर्व ही जश्न मनाना शुरू हो जाता है. सिख धर्म के अनुयायी गुरु नानक जी के भजन गाते हुए गुरुद्वारे से प्रभात फेरी निकालते हैं और 48 घंटे तक बिना रुके गुरुद्वारों में अखंड पाठ पढ़ा जाता है. कई तरह की झांकिया निकाली जाती है. जगह जगह पर लंगर  यानि प्रसाद बांटा जाता है. इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं के मन में गहन निष्ठा होती है. एक तरह से ये कहना उचिता होगा कि सिख समुदाय में गुरु नानक जंयती सबसे बड़ा पर्व होता है. 

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