नई दिल्ली. कार्तिक माह को बेहद पवित्र मास माना जाता है. इस महीने में स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. इस महीने में आने वाली पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा यानि त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है. आज कार्तिक पूर्णिमा है. बता दें ये महीना शरद पूर्णिमा से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने पहला अवतार लिया था. इस दिन विष्णु ने मत्स्य यानी मछली के रूप में प्रकट हुए थे. तभी से इस दिन पूजा-पाठ की प्रथा चली आ रही है. लेकिन कार्तिक पूर्णिमा पर सबसे ज्यादा महत्व गंगा स्नान का होता है.
 
गंगा स्नान का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान के नाम से भी जाता है. दरअसल गंगा पवित्र नदियों में से एक है. इस पूरा देश बेहद पूजनीय मानता है. वैसे तो सालभर लोग गंगा में स्नान करते हैं लेकिन कार्तिक माह में गंगा का स्नान का महत्व खास होता है. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ठीक 180 डिग्री के अंश पर होता है. इस विशेष दिन चंद्रमा से निकलने वाली प्रत्येक किरण काफी सकारात्मक होती हैं और यह किरणें सीधे सेहत पर प्रभाव डालती हैं. कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है इसलिए इन किरणों का प्रभाव सबसे अधिक पृथ्वी पर ही पड़ता है. जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है. धर्म शास्त्रों के अनुसार कलियुग में कार्तिक माह में किए गए स्नान से मोक्ष की प्राप्ति मिलती है.
 
कार्तिक पूर्ण‍िमा की पूजन विधि और दान का महत्व
कार्तिक माह में स्नान करने के बाद पूजा करनी होती है. हो सकें तो सूर्योदय से पहले स्नान करें. स्नान करने के पश्चचात भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए. इस दिन व्रत करने की प्रथा भी है. लेकिन अगर व्रत न कर पाए तो पूजा जरूर करें. बता दें जो लोग व्रत पूजा करते हैं उन्हें नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. साथ ही कार्तिक माह में दान का विशेष महत्व होता है. इस माह में गरीबों, दुर्लभों और ब्रह्राणों को दान किया जाता है. इस महीने में तुलसी दान, अन्न दान, अनाज दान, और आंवले दान  का महत्व होता है. माह भगवान विष्णु और कृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है. 
 
कार्तिक पूर्णिमा तिथि
 4 नवंबर 2017 
 
कार्तिक पूर्णिमा शुभ मुहूर्म
दोपहर 1:46 से अगले दिन सुबह 10:52 तक
 

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