नई दिल्ली. छठ पूजा के महत्व से सब वाकिफ हैं. 4 दिवसीय इस इस पर्व की रौनक देश भर में छाई हुई है. 24 अक्टबूर से शुरू हुआ छठ महापर्व आज सुबह के अर्घ्य के साथ संपन्न हो जाएगा. सभी व्रती अपने परिवार के साथ तालाब, घाट या पोखर पर सुबह का अर्घ्य देने पहुंच गए हैं. सुबह के अर्घ्य के बाद ये आज व्रती अपना 36 घंटे का निर्जलाव्रत खोल लेगी. इस व्रत को सबसे कठिन व्रत में से एक माना जाता है. इस पर्व की महत्ता को देखते हुए इसे महापर्व की संज्ञा दी गई है. 
 
भोर या ऊषा अर्घ्य का महत्व 
 
भोर का अर्घ्य का विशेष महत्व होता है. इस दिन व्रती सुबह सूर्य उदय यानि सूर्य उगने से पहले पूरे परिवार के साथ डाला लेकर घाट पर जाते हैं और तालाब या नदी में खड़े होकर भगवान सूर्य और छठी मैया से प्रार्थना करते हैं. कहा जाता है कि सूर्य देव की दो पत्निया थीं ऊषा और प्रत्युषा. ये दोनों को सुबह की किरणों और शाम की किरणों से वर्णित किया जाता है. सुबह की किरणों को भोर और शाम की किरणों को सांझ कहा जाता है. 
 
भोर या ऊषा अर्घ्य विधि
 
घाट किराने प्रसाद रखा जाता है और धूप-दीप जलाया जाता है. महिलाएं छठी मैया के गीत गाती हैं. इस दौरान पूरा माहौल बेहद खूबसूरत होता और घाट की छटा देखते ही बनती है. सूर्य उगने के दौरान कच्चे दूध को सूप पर डालकर भगवान सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है. व्रती घाट पर गए सभी डाला को एक-एक कर भगवान सूर्य को अर्पित करते हैं और इस तरह भगवान सूर्य को अर्ध्य देने के बाद व्रती का व्रत पूरा होता है. छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है. छठ करने वाले लगातार 36 घंटों तक उपवास रखते हैं. इस दौरान खाना तो क्या, पानी तक नहीं पिया जाता है. 
 
भोर, सुबह के अर्घ्य की तारीख
27 अक्टूबर 2017
भोर, सुबह के अर्घ्य का का शुभ मुहूर्त
सूर्योदय 6.29 मिनट, सूर्य अस्त- 5.40 मिनट
 
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