नई दिल्ली. आज महापर्व छठ का दूसरा दिन है. छठ पर्व का जश्न चारों ओर देखा जा सकता है. नहाय-खाय के साथ 36 घंटे का सूर्य उपासना का महापर्व छठ शुरु हो गया है. खरना को व्रतियों के आत्मिक और शारीरिक शुद्धीकरण के रूप में देखा जाता है. खरना के दिन शाम को गुड़ का खीर खाने का बड़ा महत्व है. कल छठ पूजा का पहला दिन यानि नहाय खाय था. इस दिन लोगों ने अपने घरो की साफ सफाई की. और फिर तालाब, नहर, पोखर, नदी, कुंआ आदि पर स्नान करने का विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि छठ पूजा व्रत त्रेता युग से किया जा रहा है. इस व्रत के पीछे कई कथाएं प्रचलित है. छठ कथा के अनुसार कहा जाता है कि त्रेतायुग में इस व्रत को सीता मइया ने किया था. जब राम, लक्ष्मण और सीता 14 व्रत का वनवास पूरा कर लौटे थे तब उन्होंने छठी मईया का व्रत किया था. ऐसे ही लोककथा के अनुसार कहा जाता है कि जब पांडव अपना सारा राजपाठ जुए में हार गए थे तब द्रोपदी ने छठ का व्रत किया था. और उनकी मनोकामना पूरी हुई थी. तभी से ये व्रत करने की परंपरा चली आ रही है. 
 
छठ पूजा 2017: खरना या लोहंडा पूजा विधि
छठ के दूसरे दिन खरना से उपवास शुरू हो जाता है. खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रहने के बाद शाम को मिट्टी के बने नए चूल्हे पर आम की लकड़ी की आंच से गाय के दूध में गुड़ डालकर खीर और रोटी बनाते हैं. खरना के दिन पांच तरह के पकवान तैयार करके छठी माई को भोग लगाया जाता है. इसमें दाल, भात, चावल का पीठा, गुड़ तथा फल शामिल होता है. उसके बाद इसे भोग लगाकर व्रती प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं.
 
छठ पूजा 2017: खरना करने का शुभ मुहूर्त
खरना लोहंडा मुहूर्त की तारीख- 25 अक्टूबर 2017, 
खरना या लोहंडा करने का समय- सूर्योदय 6.28 मिनट, सूर्य अस्त- 5.42 मिनट
खरना या लोहंडा करने का शुभ मुहूर्त- शाम 7 बजे से 10.00 तक
 

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