नई दिल्ली. छठ पर्व को लोक आस्था के रूप में जाना जाता है. इस त्योहार की मान्यता इतनी है कि घर से बाहर कोसों दूर रह रहे हैं लोग इस दिन अपने घर पर लौटते हैं. वैसे तो छठ का पर्व साल में दो बार मनायी जाते है. एक छठ होली यानि चैत्र के महीने में मनाई जाती है. और दूसरी छठ दिवाली के 6 दिन बाद मनाई जाती है. ये पर्व पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में छठ पूजा बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस व्रत को पारिवारिक सुख और समृद्धि के लिए किया जाता है. 
 
ये त्योहार चार दिन तक मनाया जाता है. इस दौरान महिलाएं नदी या तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं. छठ का त्योहार नहाय खाय से शुरू होता है. और ये सांझ या शाम के अर्घ्य करने के बाद संपन्न होता है. ऐसी मान्यता है कि जब पांडव जुए में अपना सारा राज-पाट हार गए तब द्रौपदी ने छठ का व्रत किया. तब से मान्यता है कि व्रत व पूजा करने से दौपद्री की मनोकामना पूरे हो गयी थी. तभी से इस व्रत को करने प्रथा चली आ रही है. इसी प्रकार कहा जाता है कि सूर्य देव और छठी देवी का रिश्ता भाई-बहन का है.  छठ त्योहार की खासियत ये है कि इस व्रत को शुद्धता और बहुत साफ-सफाई के साथ किया जाता है. इसीलिए आज हम आपको अपनी इस खबर के जरिए बताने जा रहे हैं कि छठ पूजा के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए और किन गलतियों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए.
 
1. छठी मैया का प्रसाद बनाते वक्त शुद्धता और पवित्रता का पूरा ध्यान रखें. नहा-धो कर ही साफ बरतनों का प्रयोग कर प्रसाद बनाएं.
2. जब तक प्रसाद न बन जाएं इतने कुछ न खाएं.
3. पूजा के किसी भी सामान को पैर न लगाएं.
4. सूर्य को अर्घ्य देते वक्त प्लासटिक, कांच, स्टील के बर्तन का प्रयोग न करें.
5.छठी मैया की मनौती को जरूर पूरा करें. कामना पूरा करने के बाद आपने जो छठी मैया को चढ़ाने के लिए बोला था उसे पूरा करें.
 

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