नई दिल्ली : आज गोवर्धन पूजा 2017 का त्योहार बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जा रहा है, हम सभी ने बचपन से एक बात सुनी है कि भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाया जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर 56 का आंकड़ा आया कहां से ? शायद आप लोग इस बात से अंजान होंगे कि धर्मग्रंथों में 56 भोग की महिमा के बारे में बताया गया है. 56 भोग के पीछे कई कथाएं भी प्रचलित हैं. ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण एक दिन में अष्ट पहर (आठ बार) भोजन करते थे, मां यशोदा उन्हें अलग-अलग पकवान बनाकर खिलाती थीं. गोवर्धन पूजा का अपनी ही खास महत्व है.
 
आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि ये बात उस समय कि है जब इंद्र के प्रकोप से ब्रज को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया था. सात दिनों तक भगवान श्रीकृष्ण ने अन्न जल ग्रहण नहीं किया था. आठवें दिन जब वर्षा थमी तो भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को घर जाने के लिए कहा और फिर उन्होंने गोवर्धन पर्वत को जमीन भी रख दिया. मां यशोदा और ब्रजवासियों को ये बात बिल्कुल पंसद नहीं आई कि एक दिन में आठ बार भोजन करने वाले कन्हैया एक या दो नहीं बल्कि सात दिनों तक भूखे रहे. आठवें दिन वर्षा रुकने के बाद जब सभी ब्रजवासी अपने घर चले गए तो पूरे गांव वालों ने सातों दिन के आठ प्रहर के हिसाब से पकवान बनाए और भगवान को भोग लगाया. उसी दिन से भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने की प्रथा चली आ रही है.
 
56 भोग में शामिल की जाती हैं ये चीजें
 
भक्त (भात), सूप (दाल), प्रलेह (चटनी), सदिका (कढ़ी), दधिशाकजा (दही शाक की कढ़ी), सिखरिणी (सिखरन), अवलेह (शरबत), बालका (बाटी), इक्षु खेरिणी (मुरब्बा), त्रिकोण (शर्करा युक्त), बटक (बड़ा), मधु शीर्षक (मठरी), फेणिका (फेनी), परिष्टश्च (पूरी), शतपत्र (खजला), सधिद्रक (घेवर), चक्राम (मालपुआ), चिल्डिका (चोला), सुधाकुंडलिका (जलेबी), धृतपूर (मेसू), वायुपूर (रसगुल्ला), चन्द्रकला (पगी हुई), दधि (महारायता), स्थूली (थूली), कर्पूरनाड़ी (लौंगपूरी), खंड मंडल (खुरमा), गोधूम (दलिया), परिखा, सुफलाढय़ा (सौंफ युक्त), दधिरूप (बिलसारू), मोदक (लड्डू) ,शाक (साग), सौधान (अधानौ अचार), मंडका (मोठ), पायस (खीर), दधि (दही), गोघृत, हैयंगपीनम (मक्खन), मंडूरी (मलाई), कूपिका (रबड़ी), पर्पट (पापड़), शक्तिका (सीरा), लसिका (लस्सी), सुवत, संघाय (मोहन), सुफला (सुपारी), सिता (इलायची), फल, तांबूल, मोहन भोग, लवण, कषाय, मधुर, तिक्त, कटु, अम्ल. 56 भोग में इन सभी चीजों का भोग लगाया जाता है.
 

 

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