नई दिल्ली. कल यानी कि 19 अक्टूबर को रोशनी का पर्व दिवाली है. ये पर्व हिंदुओं के लिहाज से काफी अहम होता है. घर में सुख-समृद्धि और धन लाभ के लिए गणेश-लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है. दिवाली का त्योहार तो वैसे तो सभी लोगों के लिए खास होता है, मगर सबसे अहम दुकानदार और व्यापारियों के लिए होता है. ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन से ही दुकानदारों और व्यापारियों के लिए नया साल शुरू होता है. दिवाली का दिन दुकानदार और व्यापारियों के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन से बही खाते में काम शुरू होता है. 
 
दिवाली में दुकानदार और व्यापारी बही-खातों, तराजू और गल्ला से ही लक्ष्मी और गणेश की पूजा करते हैं. दिवाली के मौके पर बही खातों के लिए भी एक शुभ मुहूर्त होता है. इतना ही नहीं, बही खातों के बदलने के लिए भी खास नियम और विधि का ख्याल रखना पड़ता है. बही खातों के पूजन से पहले शुभ मुहूर्त में नये बही खाता पर केसर युक्त चंदन से या फिर लाल कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए. 
 
इतना ही नहीं, बही खाता के ऊपर चंदन या हल्दी या फिर लाल रंग से ‘श्री गणेशाय नम:’ लिखना चाहिए. इसके साथ ही एक नई थैली लेकर उसमें हल्दी की पांच गांठे, कमलगट्ठा, अक्षत, दुर्गा, धनिया व दक्षिणा रखकर, थैली में भी स्वास्तिक का चिन्ह लगाकर सरस्वती मां का स्मरण करना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि बही खाता के ऊपर पंडित जी से श्री गणेशाय नम: लिखवाना ज्यादा शुभ होता है. 
 
ऐसी मान्यता है कि दिवाली के पहले ही शुभ मुहूर्त देखकर दुकानदार और व्यापारी बही खाते बाजार से खरीद लाते हैं. उसके बाद दिवाली के दिन पूजा के शुभ मुहूर्त में बही खाते की पूजा होती है. बही खाते की पूजा के समय नए और पुराने दोनों बही खाते को साथ रखा जाता है. गणेश लक्ष्मी जी की पूजा के बाद नये बही खातों को प्रचलन में लाया जाता है और पुराने को प्रयोग से बाहर कर दिया जाता है. 
 
हालांकि, पुराने बही खातों को हटाने का मतलब ये नहीं होता है कि उसे जला दें या फिर उसे रद्दी के भाव में बेच दे. ऐसी मान्यता है कि बही खातों को सहेज कर रखा जाता है. इससे व्यवसाय और दुकान से जुड़े सारे रिकॉर्ड उपलब्ध होते हैं. इसलिए पुराने बही खातों की भी पूजा गणेश-लक्ष्मी पूजा के साथ करनी चाहिए. इस दिन से नये बही खातों को प्रचलन में लाया जाता है. 
 
लक्ष्मी-गणेश पूजा के समय नवग्रह यंत्र बनाने की परंपरा है. पूजा के लिए भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति को स्थापित किया जाता है. साथ ही दीपक जलाया जाता है, फूल-अक्षत, गंगाजल आदि रखे जाते हैं. साथ ही पूजा के मंडप को भी खूब अच्छे तरीके से सजाया जाता है. 
 
दिवाली क दिन बही खाता पूजन का शुभ मुहूर्त-
 
सुबह 6.41 से 8.01 बजे तक और 10.36 से 11. 51 बजे तक
दोपहर 12.41 से 3.11 बजे तक
शाम 4.41 से 5.51 बजे तक और शाम 6.21 से 9.15 बजे तक
 
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