नई दिल्ली. हिन्दू धर्म को मानने वाले दिवाली या दीपावली इस खुशी में मनाते हैं कि इसी दिन भगवान राम लंका के राजा रावण का वध करके अपनी पत्नी सीता को छुड़ाकर अयोध्या लौटे थे. रावण का वध यानी विजयादशमी या दशहरा से दिवाली के बीच 20 दिन का समय होता है. गूगल मैप पर लोग लगातार श्रीलंका से अयोध्या की दूरी चेक करते हैं, उसकी फोटो शेयर करते हैं और ये दिखाते हैं कि श्रीलंका से अयोध्या पैदल भी 20-21 दिन में पहुंचा जा सकता है क्योंकि दोनों के बीच की दूरी करीब 2500 किलोमीटर के आसपास है. कोई बात वैज्ञानिक तरीके से प्रामाणित नहीं है लेकिन वो धर्म ही क्या जो विज्ञान का पालन करे. जहां विज्ञान और तर्क खत्म होते हैं, धर्म और आस्था वहीं से शुरू होती है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की एक तस्वीर को आधार बनाकर हिन्दूवादियों ने फोटो में रामेश्वरम से लंका तक दिखी 30 किलोमीटर लंबी लकीर को वानर सेना के हाथों बना पुल का निशान बताया जबकि नासा ने फोटो को तो कबूला पर ये विश्लेषण ठुकरा दिया और कहा कि ये प्राकृतिक रचना मात्र है.
 
दिवाली की कहानी हम सब यही मानते हैं और जानते हैं कि विजयादशमी के दिन रावण का वध करने के बाद भगवान राम 14 साल का बनवास काटकर अयोध्या लौटे थे और उनकी वापसी की खुशी में लोगों ने दीए जलाकर उत्सव मनाया था जिसे हिन्दू धर्म के लोग आज भी दिवाली या दीपावली के तौर पर मना रहे हैं. गूगल पर श्रीलंका और अयोध्या के बीच की दूरी पर तमाम तरह के गूगल मैप वाले फोटो देखकर इनखबर टीम ने खुद से इसे ट्राई किया. हमने गूगल मैप में एक तरफ लंका के हकगाला बोटैनिकल गार्डेन को डाला जिसके बारे में ये माना जाता है कि अशोक वाटिका यहीं कहीं थीं. दूसरी तरफ अयोध्या डाला और ओके का बटन दबा दिया. नतीजा में गार्डेन यानी अशोक वाटिका से अयोध्या की दूरी आई 2721 किलोमीटर. गूगल मैप का अनुमान है कि पैदल इस रास्ते को 545 घंटे में नापा जा सकता है. गूगल पर इस दूरी को लेकर कुछ इमेज दिखते हैं जिसमें पैदाल 21 दिन और 10 घंटे का समय दिखाया गया है लेकिन ये दूरी अयोध्या से रामेश्वरम की है. अगर अशोक वाटिका से कैलकुलेट करें जो आज की तारीख में हकगाला बोटैनिकल गार्डेन है तो ये दूरी ज्यादा हो जाती है.
 
सवाल ये उठता है कि भगवान राम ने 2721 किलोमीटर की दूरी 20 दिन में कैसे पूरी की. पैदल या पुष्पक विमान से. दोनों तरह की बात मानने वाले लोग पर्याप्त संख्या में हैं. जो ये मानते हैं कि भगवान राम 20 दिन में पैदल अयोध्या लौटे वो ये मानते हैं कि रास्ते में भगवान राम कहीं रुके नहीं और घोड़ों की खेप उनके लिए तैयार थी जिसकी बदौलत वो थके घोड़ों को छोड़ते और तरो-ताजा घोड़े की सवारी करते अयोध्या पहुंच गए. इस हिसाब से भगवान राम को करीब-करीब 136 किलोमीटर हर रोज चलना पड़ा होगा. जो लोग ये मानते हैं कि भगवान राम पुष्पक विमान से लौटे वो ये मानते हैं कि भगवान राम ने वापसी के 20 दिन सीता माता को विरह के दौरान लंका जाने के रास्ते में मिले अनूठे जगह वगैरह दिखाते हुए लौटे. पुष्पक विमान से लौटने की बात में यकीन रखने वाले मानते हैं कि अयोध्या पहुंचने से पहले राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान और विभीषण को लेकर उड़ रहा पुष्पक विमान संगम के तट पर उतरा जहां सबने स्नान किया.
 
एक मत ये भी- दिवाली और राम का संबंध नहीं क्योंकि वो मार्च-अप्रैल में अयोध्या लौटे थे 
 
वैसे, जब दिवाली के नाम पर भगवान राम की अयोध्या वापसी की कहानी आप पढ़ ही रहे हैं तो ये भी जान लीजिए कि हिंदू धर्म के कुछ लोग ये भी मानते हैं कि भगवान राम की अयोध्या वापसी और दिवाली का कोई संबंध ही नहीं है. इनका मानना है कि भगवान राम कार्तिक यानी अक्टूबर-नवंबर नहीं बल्कि चैत्र या चैत महीने यानी मार्च-अप्रैल में अयोध्या लौटे थे. इनका कहना है कि भगवान राम चैत्र की षष्ठी पर बनवास पर निकले थे और ठीक 14 साल बाद लौटने की बात कहकर गए थे. भाई भरत ने भगवान राम से कहा था कि अगर वो समय पर नहीं लौटे तो वो अग्नि में खुद को समाहित कर देंगे. इस पर भगवान राम ने कहा था कि वो समय पर लौटेंगे. लंका से लौटने के क्रम में भगवान राम चैत्र पंचमी को ऋषि भारद्वाज के आश्रम में रुके और ठीक चैत्र षष्ठी के दिन अयोध्या पहुंचे. अंग्रेजी में चैत्र यानी चैत महीने को मार्च-अप्रैल के बीच में माना जाता है. ये हिन्दू कैलेंडर का पहला महीना है जब नए साल की शुरुआत होती है.
 
इस मत को मानने वालों का कहना है कि सीता माता को रावण ने वसंत ऋतु में अगवा किया था और उन्हें 12 महीने का वक्त दिया था जिस दौरान वो रावण को कबूल कर लें. सीता जी लंका में करीब 11 महीने तक कैद रहीं. जब हनुमान उनसे मिलने गए तो उन्होंने भगवान राम के लिए यही संदेश भिजवाया कि रावण ने उन्हें दो महीने का वक्त दिया है जिसके बाद वो अपनी जान दे देंगी. राम ने हनुमान के जरिए सीता का संदेश पाकर सुग्रीव को फाल्गुन महीने में लंका पर चढ़ाई करने का आदेश दिया था. इनका मानना है कि रावण चैत महीने की अमावस्या के दिन मारा गया था और भगवान राम चैत महीने की षष्ठी को अयोध्या पहुंचे थे. इनके मुताबिक दिवाली या दीपावली गर्मी की फसल के बाद कार्तिक महीने में उत्सव का पर्व रहा है जिसे किसान और वैश्य मनाते थे.
 
हिन्दू धर्म में दिवाली को लेकर दो-तीन और प्रचलित कथाएं हैं. भगवान राम की अयोध्या वापसी के बाद इसे देवी लक्ष्मी के अवतार की याद में मनाने का चलन है. तीसरी कहानी भगवान श्रीकृष्ण के हाथों नरकासुर के इसी दिन वध से जुड़ी है. चौथी कहानी पांडवों की घर वापसी से जुड़ी है. कहानियां जैसी भी हों और जितनी भी हों, हर कहानी का सार यही है कि दिवाली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. वो बुराई दानव के रूप में हो या कुरीतियों के रूप में. उसे हराना ही दिवाली का सही मतलब है. 
 
 
टीवी पर दिखे दो रामायण सीरियल में भगवान राम की अयोध्या वापसी का वीडियो

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