नई दिल्ली.  छठ पूजा भले ही बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के लोग मनाते हैं, मगर इसकी ख्याति विदेशों तक में है. वैसे तो सभी पर्व-त्योहार अहम होते हैं मगर छठ महापर्व की बात ही निराली है. बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के लोगों के बीच धर्म और आस्था के प्रतीक के तौर पर छठ महापर्व को सभी पर्व-त्योहार में सबसे ऊपर स्थान दिया गया है. भले ही यूपी-बिहार के बाहर लोग छठ पर्व के बारे में काफी कुछ कम ही जानते हैं, मगर आप इस पर्व की गहराई में जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि छठ पर्व को मनाने के भी कई तरीके होते हैं. आगे बात करने से पहले इस बात को जानना काफी अहम है कि छठ पर्व को स्त्री-पुरुष दोनों ही करते हैं. छठ पर्व को सूर्य की उपासना का पर्व कहा जाता है, मगर बिहार के गांवों में इस पर्व के पीछे मुख्य रूप से छठी मइया ही हैं. छठ व्रति यानी छठ पर्वइतिन की कुछ मन्नतें होती हैं. छठ व्रत में पूजा विधि सबकी एक समान होती है, मगर उसे पूर्ण करने की विधि अलग-अलग होती है.
 
दंड सहित छठ व्रत- इसमें छठ व्रति घर से घाट तक दंड देते हुए पहुंचती हैं. ये शाम और सुबह के अर्ध्य के समय होता है. इसके पीछे छठ व्रति की मन्नतें होती हैं. जब किसी की कुछ मन्नत पूरी हो जाती है तो वो अपने संकल्प अनुसार छठी मइया को दंड देती है. 
 
घर में हाथी की स्थापना- छठ पूजा में शाम वाले अर्ध्य की रात में घर में या घाट पर मिट्टी के बने हाथी की स्थापना होती है. इसके चारों ओर ईंख और प्रसाद रखे जाते हैं. इसके बाद गांव-घर की औरतें यानी कि छठ व्रति हाथी के पास बैठकर छठी मइया की पारंपरिक गीत गाती हैं. इस दौरान वो छठ से जुड़ी कई कहानियों और भजनों का औरतें श्रवण करती हैं. 
 
कलश-कोसी की स्थापना- छठ व्रति अपनी-अपनी इच्छा और मन्नत के अनुसार कोई मिट्टी से बने हाथी की स्थापना करती हैं तो कोई सिर्फ कलश-कोसी की स्थापना करती हैं. इसके चारों ओर भी दिये जलाकर, प्रसाद रखकर छठी मइया के गीत गाये जाते हैं. 
 
कलश-कोसी और हाथी का विसर्जन- भोर यानी कि सुबह के अर्ध्य के समय हाथी और कलश कोसी का विसर्जन नदी या पोखर में कर दिया जाता है, जहां पर छठ घाट बने होते हैं. कुछ लोग तो उन हाथियों को घर के छतों पर रखते हैं. ऐसी मान्यता है कि मिट्टी से बने हाथी को घर के छट पर रखने से शुभ होता है. 
 
सामो-चकवा: छठ व्रत के दौरान पारंपरिक खेल सामो-चकवा की भी प्रथा है. छठ व्रत करने वाली औरतें और लड़कियां इस दौरान मिट्टी से बने सामो-चकवा भाई-बहन के खेल को खेलती हैं और इस दौरान सामोचकवा लोकगीत भी गाती हैं. सामो-चकवा को शाम के अर्ध्य के रोज से गांगा स्नान तक खेला जाता है और फिर उसी दिन नदी में विसर्जित कर दिया जाता है. 
 
छठ पूजा कैलेंडर 2017
छठ पूजा के पहले दिन यानि नहाय-खाय समय और तारीख 24 अक्टूबर 2017 को है. इस दिन स्नान करने का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजे से दिन 2.30 बजे तक रहेगा. दूसरे दिन यानि खरना जो 24 अक्टूबर 2017 के दिन है. इस दिन सूर्योदय 6.28 मिनट को और सूर्य अस्त- 5.42 मिनट पर होगा. छठ पूजा के तीसरे दिन सांझ का अर्घ्य यानि शाम का अर्घ्य होता है. इस सूर्योदय 6.29 मिनट, सूर्य अस्त- 5.41 मिनट पर होगा. छठ पूजा के आखिरी दिन यानि चौथे दिन भोर का अर्घ्य होता है. इस दिन  27 अक्टूबर 2017 को  सूर्योदय 6.29 मिनट पर और सूर्य अस्त 5.40 मिनट होगा. 
 

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