नई दिल्ली : एक और जहां 19 अक्टूबर 2017 को पूरा देश दिवाली 2017 को धूमधाम से मना रहा होगा तो वहीं पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम और बांग्लादेश में दिवाली की धूम देखने को नहीं मिलेगी. दिवाली की रात यानी की कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मां काली की पूजा की जाती है. काली पूजा को श्यामा पूजा या महानिषि पूजा के नाम से भी जाना जाता है. इस साल काली पूजा 19 अक्टूबर 2017 को है. भारत में अधिकांश लोग अमावस्या तिथि दिवाली के दौरान पर देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं जबकि पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और असम में लोग मां काली की पूजा करते हैं.
 
अमावास्या तिथि का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2017 00.13 से शुरू होकर 20  अक्टूबर 2017 00:41 बजे पर समाप्त होगा. लोगों में फेस्टिव सीजन का खुमार छड़ा हुआ है, सालों से दिवाली पूजा और काली पूजा एक ही दिन पर आई है 
 
लेकिन कुछ सालों में ऐसा भी देखा गया है कि काली पूजा दिवाली पूजा से एक दिन पहले आई थी. कोलकाता में लोग मां काली की मूर्ति की खरीदारी कर रहे हैं. मंदिर परिसर में साफ-सफाई के बाद रंग-रोगन का काम चल रहा है. मूर्तिकार मां काली की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं. कोलकाता, उड़ीसा और असम के दक्षिणेश्वर में विश्व प्रसिद्ध मां काली का मंदिर है. 
 
मां काली की पूजा का महत्व
 
मां काली की पूजा-आराधना से भय (डर) खत्म होता है, आप लोग शायद इस बात से अंजान होंगे कि मां की आराधना करने से रोगों से मुक्ति मिलती है. आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि राहु और केतु की शांति के लिए मां काली की उपासना अचूक है. मां काली अपने भक्तों की रक्षा कर शत्रुओं का नाश करती हैं केवल इतना ही नहीं मां की पूजा करने से तंत्र-मंत्र का असर भी खत्म हो जाता है.
 
मां काली की पूजा दो माध्यम से की जा सकती है, एक सामान्य और दूसरी तंत्र पूजा. सामान्य पूजा तो कोई भी कर सकता है लेकिन तंत्र पूजा बिना गुरू के संरक्षण और निर्देशों के नहीं की जा सकती. मां काली की पूजा का सही समय मध्य रात्रि का होता है. मां काली की पूजा में लाल और काली वस्तुओं का विशेष महत्व है.
 

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