नई दिल्ली: दिवाली के 6 दिन बाद छठ महापर्व आता है. चार दिन का तक चलने वाले ये पर्व 24 तारीख, मंगलवार से शुरू हो गया है.नहाय खाय के बाद 25 तारीख को खरना 26 तारीख को सांझ का अर्ध्य और 27 तारीख को भोर का अर्ध्य के साथ ये त्योहार संपन्न होगा. आज सांझ का अर्घ्य है. छठ पर भगवान सूर्य की उपासना की जाती है. ऐसा विश्वास है कि छठ पूजा करने वाले को सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है और व्रती की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. छठ पूजा को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है. छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है. छठ करने वाले लगातार 36 घंटों तक उपवास रखते हैं. इस दौरान खाना तो क्या, पानी तक नहीं पिया जाता है. 
 
छठ पूजा 2017 पहला चरण नहाय-खाय
छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा नेपाल के तराई इलाकों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. हालांकि अब इस त्योहार की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ रही है कि ये त्योहार बिहार- झारखंड से निकलकर देश-विदेश में भी बनाया जाने लगा है. छठ पर्व का पहला चरण है नहाय खाय- कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी को नहाय-खाय होता है. इस दिन पूरे घर की साफ सफाई कर छठवर्ती स्नान करते हैं और खाने में अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू ग्रहण करते हैं. इसी दिन से व्रती बिस्तर पर सोना त्याग देते हैं और व्रत संपन्न होने तक बिस्तर पर नहीं सोते हैं.
 
नहाय खाय का शुभ मुहूर्त- सुबह 7 बजे से लेकर 2.30 तक
 
छठ पूजा 2017 दूसरा चरण खरना
नहाय खाय के बाद व्रत का अगला चरण होता है खरना. यानी नहाय खाय के दूसरे दिन खरना होता है जो कार्तिक शुक्ल की पंचमी तिथि होती है. इस दिन व्रतधारी दिनभर उपवास कर शाम को भोजन करते हैं. भोजन में गुड़ की खीर खाते हैं. इस दौरान किसी भी तरह की आवाज आने पर व्रती खाना छोड़ देते हैं. खरना वाले दिन खास तौर पर ध्यान रखा जाता है कि व्रती के कान तक किसी भी तरह का शोर ना जाए. खरना के दिन सड़कों पर कम से कम गाड़ियां चलती हैं. लोग ध्यान रखते हैं कि कहीं किसी तरह का शोर ना हो क्योंकि जरा सा भी शोर हुआ तो व्रती उसी वक्त खाना छोड़ देगा. 
 
छठ पूजा 2017 तीसरा चरण सांझ का अर्ध्य
खरना के बाद तीसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल की षष्ठी के दिन व्रती सारे दिन छठ का प्रसाद बनाते हैं. इस दौरान परिवार के सदस्य पूरी साफ-सफाई के साथ प्रसाद बनाने में मदद करते हैं. इस दौरान छठी मैया के गीत गाए जाते हैं. छठ का प्रसाद बनाने के दौरान कई सावधानियां बरतनी होती है. छठ के प्रसाद में ठेकुआ, भुसवा केला, पानी वाला नारियल, गन्ना, डाब नींबू, चावल के लड्डू (लड़ुआ), लाय का सांचा और फल आदि मुख्य तौर पर शामिल किए जाते हैं. छठ के प्रसाद के दौर पर ठेकुआ और भुसवा सबसे ज्यादा मशहूर है जिसे बनाने के लिए बड़ी सावधानी से आंटा तैयार किया जाता है. इस दौरान साफ सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है. शाम के वक्त बांस की टोकरी में अर्ध्य का सूप सजाकर व्रती अपने परिवार और सगे संबंधियों समेत सूर्य को अर्ध्य देने घाट पर जाते हैं. इस दौरान व्रती जल में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को जल और दूध का अर्ध्य देते हैं. इस दिन भी व्रती कुछ नहीं खाते हैं.
 
छठ पूजा 2017 चौथा चरण भोर का अर्ध्य
इसके बाद व्रत का चौधा और आखिरी पड़ाव आता है भोर का अर्ध्य. इस दिन व्रती सुबह सूर्य उगने से पहले पूरे परिवार के साथ डाला लेकर घाट पर जाते हैं और जल में खड़े होकर भगवान सूर्य और छठी मैया से प्रार्थना करते हैं. घाट किराने प्रसाद रखा जाता है और धूप-दीप जलाया जाता है. महिलाएं छठी मैया के गीत गाती हैं. इस दौरान पूरा माहौल बेहद खूबसूरत होता और घाट की छटा देखते ही बनती है. सूर्य उगने के दौरान कच्चे दूध को सूप पर डालकर भगवान सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है. व्रती घाट पर गए सभी डाला को एक-एक कर भगवान सूर्य को अर्पित करते हैं और इस तरह भगवान सूर्य को अर्ध्य देने के बाद व्रती का व्रत पूरा होता है.
 

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