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Tulsi Demand: भारत में तुलसी को सिर्फ एक पौधा नहीं माना जाता, बल्कि यह घर-घर में आस्था और परंपरा से जुड़ी हुई है. सुबह-शाम इसकी पूजा की जाती है और इसे शुभ माना जाता है. अब यही भारतीय तुलसी विदेशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. खासकर बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया और कई खाड़ी देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
तुलसी से बने हर्बल उत्पाद, चाय, अर्क और तेल वहां के लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय तुलसी की पहचान पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होती जा रही है.
विदेशों में क्यों बढ़ रही है तुलसी की मांग?
पिछले कुछ वर्षों में आयुर्वेद और प्राकृतिक उत्पादों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है. कई देशों के लोग अब केमिकल वाले उत्पादों की जगह प्राकृतिक विकल्प चुन रहे हैं. तुलसी इसी वजह से चर्चा में है.तुलसी का उपयोग हर्बल चाय, हेल्थ ड्रिंक, ऑयल, स्किन केयर और वेलनेस उत्पादों में किया जा रहा है. इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने भारतीय निर्यातकों के लिए भी नए अवसर पैदा किए हैं.
बांग्लादेश, मलेशिया और इंडोनेशिया में क्यों पसंद की जा रही है तुलसी?
इन देशों में लोग प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों को तेजी से अपना रहे हैं. तुलसी को एक उपयोगी हर्ब के रूप में देखा जा रहा है.
- तुलसी से बनी हर्बल चाय की मांग बढ़ी है.
- वेलनेस और फिटनेस इंडस्ट्री में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है.
- स्किन केयर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी तुलसी का उपयोग किया जा रहा है.
- कई लोग इसे रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा बना रहे हैं.
तुलसी की चाय भी बनी पसंद
ढाका, कुआलालंपुर और जकार्ता जैसे शहरों में तुलसी से बनी चाय की लोकप्रियता बढ़ रही है. लोग इसे सामान्य चाय के विकल्प के रूप में आजमा रहे हैं. हर्बल ड्रिंक की बढ़ती मांग का फायदा भारतीय तुलसी को भी मिल रहा है.
खाड़ी देशों में भी बढ़ रहा है बाजार
खाड़ी देशों में भारतीय हर्बल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. तुलसी (Holy Basil) युक्त तेल, फेस मास्क और वेलनेस उत्पाद कई प्रीमियम स्पा और ब्यूटी सेंटर में इस्तेमाल किए जा रहे हैं.विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक हर्बल बाजार में तुलसी का योगदान और बढ़ सकता है.
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