Sikhs Marriage: हिंदू धर्म में शादी से पहले लड़के-लड़की की कुंडली, ग्रह-नक्षत्र और दशा आदि देखे जाते हैं. इसके बाद ही शादी तय की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिख समुदाय की शादियों में कुंडली, ग्रह-नक्षत्र और दशा आदि को महत्वता नहीं दी जाती है बल्कि इसकी जगह आपसी समझ, परिवा के बारे में और व्यक्तिगत स्वभाव को महत्व दिया जाता है. कहा जाता है कि इस प्रथा के पीछे का कारण है कि सिख समुदाय के लोग ईश्वर में अटूट विश्वास और व्यवहार को सर्वोपरि रखा जाता है.
क्या है धार्मिक मान्यता और तर्क
- सिख धर्म में माना जाता है कि ईश्वर ही इकलौता सृष्टिकर्ता है. गुरु ग्रंथ साहिब में ज्योतिष, शकुन और कुंडली आधारित अंधविश्वासों का विरोध किया गया है. माना जाता है कि ईश्वर हर पल हमारे साथ है और उससे बड़ा कोई नक्षत्र नहीं हो सकता.
- सिख धर्म में कर्म, दान और निस्वार्थ सेवा को सबसे बड़ा कर्म माना जाता है. सिख धर्म में अच्छे कर्म और परोपकार को ही मनुष्य के भाग्य को आकार देने का आधार माना जाता है.
- आपको जानकर हैरानी होगी कि सिख धर्म में ऊंच, नीच, जाति और अंधविश्वास की कोई जगह नहीं है. वहीं कुंडली मिलाने में मांगलिक और वर्ण के आधार पर भेदभाव किया जाता है, जिसके कारण इन सब चीजों को मान्यता नहीं दी जाती है.
- सिख समुदाय में माना जाता है कि एक सफल विवाह कुंडली और गुणों के मिलान से नहीं बल्कि दो लोगों के बीच के प्यार, विश्वास, सोच औ त्याग से चलती है.
सिख धर्म में शादी को क्या माना जाता है?
बता दें कि सिख धर्म में शादी को आनंद कारज माना जाता है. इसका अर्थ है कि कोई अच्छा काम या आनंद का मिलन होना. इसे बराबरी का सफर माना जाता है. सिख धर्म में शादी को दो आत्माओं का मिलन नहीं बल्कि परमात्मा का मिलन माना जाता है. सिख धर्म के लोग शादी तय करते समय परिवार, वर-वधू की योग्यता, शिष्टाचार और पारिवारिक मेल-मिलाप को प्राथमिकता देते है.
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