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Shukra Pradosh Vrat 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. यही कारण है कि शिव भक्त इस दिन पूरे श्रद्धाभाव से व्रत और पूजा-अर्चना करते हैं.
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को रात 7 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी. यह तिथि 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि और प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए 12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत किया जाएगा.
सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग
इस बार प्रदोष व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. यह योग 12 जून की सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 6 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र में इस योग को अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों और पूजा-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है.
शिव पूजा का शुभ समय
प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है. 12 जून को शाम 7 बजकर 36 मिनट से रात 9 बजकर 20 मिनट तक शिव पूजा का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा. इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर पूजा की जा सकती है.
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. इस दिन की गई पूजा से नकारात्मकता दूर होती है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. साथ ही जाने-अनजाने में हुए दोषों और पापों से मुक्ति मिलने की भी मान्यता है.
सूर्य और चंद्रमा का समय
12 जून को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 19 मिनट पर होगा. वहीं 13 जून को चंद्रोदय रात 3 बजकर 5 मिनट पर तथा चंद्रास्त शाम 4 बजकर 18 मिनट पर रहेगा.शिव भक्तों के लिए यह दिन पूजा, ध्यान और आध्यात्मिक साधना का उत्तम अवसर माना जा रहा है. श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई आराधना से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है.
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